पंकज कुमार/न्यूज़11 भारत
गुमला/डेस्क: घाघरा के चपका में शहीद संतोष उरांव की प्रतिमा करीब एक महीने से क्षतिग्रस्त होकर जमीन पर पड़ी है. बावजूद इसके अब तक प्रतिमा की मरम्मत और पुनर्स्थापना नहीं होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है. लोगों ने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से सवाल किया है कि शहीद की प्रतिमा की देखरेख आखिर किसकी जिम्मेदारी है?
सबसे अहम बात यह है कि 17 नवंबर को शहीद संतोष उरांव की चौथी पुण्यतिथि मनाई जानी है. प्रत्येक वर्ष पुण्यतिथि के अवसर पर अधिकारी, जनप्रतिनिधि और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता पहुंचकर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. ऐसे में पुण्यतिथि से पहले प्रतिमा का टूटकर जमीन पर पड़ा होना व्यवस्था के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है.
फूल चढ़ाने से पहले प्रतिमा की सुध लेने की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहीद की प्रतिमा महज एक मूर्ति नहीं, बल्कि उनके बलिदान और संघर्ष की स्मृति का प्रतीक है. ऐसे स्मारक का लंबे समय तक क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़े रहना चिंता का विषय है. लोगों का कहना है कि पुण्यतिथि पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि देने से पहले शहीद की प्रतिमा की स्थिति को दुरुस्त करना भी जिम्मेदारों की प्राथमिकता होनी चाहिए.
लोगों ने सवाल उठाया कि क्या 17 नवंबर से पहले प्रतिमा की मरम्मत कर उसे सम्मानपूर्वक स्थापित किया जाएगा, या इस वर्ष भी टूटे हाल में पड़ी प्रतिमा के सामने ही श्रद्धांजलि की औपचारिकता पूरी होगी?
स्थायी रखरखाव की व्यवस्था की उठी मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि पुण्यतिथि से पहले प्रतिमा की मरम्मत कराकर उसे सम्मानपूर्वक स्थापित कराया जाए. साथ ही प्रतिमा स्थल की साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण और नियमित रखरखाव की स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में शहीद की प्रतिमा इस तरह उपेक्षित अवस्था में न पड़े रहे. अब नजर इस बात पर है कि 17 नवंबर की पुण्यतिथि से पहले जिम्मेदारों की ओर से प्रतिमा की सुध ली जाती है या नहीं.