ब्योमकेश मिश्रा/न्यूज़11 भारत
चंदनकियारी/डेस्क: बरमसिया ओपी क्षेत्र के पारबहाल गांव में 22 जून 2024 को दिनदहाड़े हुई 35 वर्षीय सरस्वती देवी की हत्या का मामला दो वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक अनसुलझा है. घटना के समय पुलिस को कई अहम सुराग मिलने के बावजूद मामले का उद्भेदन नहीं हो सका है, जिससे परिजनों में निराशा और आक्रोश बना हुआ है.
बताया जाता है कि स्वर्गीय राजेश उर्फ फेनका रजवार की पत्नी सरस्वती देवी का शव गांव के उत्क्रमित मध्य विद्यालय के पीछे स्थित झाड़ियों से बरामद किया गया था. ग्रामीणों की सूचना पर बरमसिया ओपी पुलिस मौके पर पहुंची थी. मृतका के ससुर सोहनी रजवार ने उसी समय गांव के एक व्यक्ति पर हत्या की आशंका जताते हुए न्याय की गुहार लगाई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है.
परिजनों के अनुसार, पति की बीमारी से मौत के बाद सरस्वती देवी गांव के ही एक युवक के साथ अपने दो नाबालिग पुत्रों, 11 वर्षीय चंदन और 5 वर्षीय नंदन, को लेकर राजस्थान चली गई थी. वहां दोनों मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे थे. घटना से लगभग दस दिन पहले उक्त युवक दोनों बच्चों को गांव वापस छोड़ गया, लेकिन उनकी मां के बारे में कोई जानकारी नहीं दी.
मृतका के बड़े पुत्र चंदन ने बताया था कि वे अपनी मां के साथ एक युवक के साथ पुरुलिया रेलवे स्टेशन से ट्रेन द्वारा राजस्थान गए थे, जहां वे सभी एक ही कमरे में रहते थे. एक दिन मां के काम पर जाने के बाद युवक दोनों भाइयों को लेकर गांव छोड़ गया, जिसके बाद उनकी मां के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.
इसके कुछ ही दिनों बाद 22 जून की सुबह गांव के पास झाड़ियों में सरस्वती देवी का शव मिलने से सनसनी फैल गई थी.
आज स्थिति यह है कि पिता की मौत और मां की हत्या के बाद दोनों मासूम बच्चे बेसहारा हो गए हैं. उनका पालन-पोषण दिव्यांग वृद्ध दादा-दादी के सहारे चल रहा है, जो मवेशी चराकर किसी तरह अपना और बच्चों का पेट पाल रहे हैं. आर्थिक तंगी के कारण बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है.
परिजन कई बार पुलिस से न्याय की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन समय बीतने के साथ उनकी उम्मीदें भी कमजोर पड़ती जा रही हैं. गांव में यह मामला आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जल्द से जल्द मामले के खुलासे की मांग कर रहे हैं.
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