रोहन निषाद/न्यूज़ 11 भारत
चाईबासा/डेस्क: कोल्हान विश्वविद्यालय चाईबासा के स्नातकोत्तर वनस्पति विज्ञान विभाग में 28 अप्रैल को आयोजित ओपन वाइवा के बाद शोधार्थी पुष्पा शालो लिंडा को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई. उन्होंने अपना शोध कार्य एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कृष्णा प्यारे के निर्देशन में पूरा किया.
शोध का विषय और पौधे
पुष्पा शालो लिंडा के शोध का विषय था. भारत के झारखंड राज्य के दलमा रेंज में यूफोर्बिएसी कुल के कुछ औषधीय पौधों का फाइटोकेमिकल अध्ययन तथा उनके रोगाणुरोधी गुणों का मूल्यांकन. शोध में यूफोर्बिएसी कुल के सात पारंपरिक औषधीय पौधों, अकालाईफा इंडिका, क्रोटन स्पार्सीफ्लोरस, यूफोर्बिया हिरटा, यूफोर्बिया थायमीफोलिया, जेट्रोफा करकस, फिलैंथस निरुरी एवं रिसिनस कम्युनिस के औषधीय गुणों का गहन अध्ययन किया गया.
शोध के प्रमुख निष्कर्ष
अध्ययन में पाया गया कि इन पौधों में एल्कलॉइड, फ्लेवोनॉइड, फिनोल, टैनिन, टरपेनॉइड, फाइटोल, नियोफाइटाडाइन, हेक्साडेकेनोइक एसिड, बीटा एमिरिन एवं स्क्वेलीन जैसे सेकेंडरी मेटाबोलाइट्स और रोगाणुरोधी तत्व मौजूद हैं. ये तत्व रोग उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया और कवकों की वृद्धि रोकने में सक्षम हैं. शोध के अनुसार, इन पौधों से प्राकृतिक और सुरक्षित एंटीबायोटिक विकसित किए जाने की संभावना प्रबल है, जो मानव शरीर के लिए लाभकारी हो सकते हैं.
ओपन वाइवा में रहे उपस्थित
मौखिक परीक्षा में बाह्य परीक्षक के रूप में हज़ारीबाग विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. चंद्रेश्वर प्रसाद उपस्थित रहे. इस अवसर पर विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. किरण शुक्ला, डॉ. विष्णु शंकर सिन्हा, वर्तमान विभागाध्यक्ष डॉ. दारा सिंह गुप्ता, विज्ञान संकाय के डीन डॉ. कृष्णा प्यारे समेत विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे.
कुलपति का आभार
विभागाध्यक्ष डॉ. दारा सिंह गुप्ता ने कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता के सतत मार्गदर्शन और सहयोग के लिए विशेष आभार व्यक्त किया. विश्वविद्यालय परिवार और विभाग के सदस्यों ने इस उपलब्धि को गौरवपूर्ण बताते हुए शोधार्थी को बधाई दी.
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