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रांची/डेस्क: आजसू पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर ने कहा है कि ट्रेज़री घोटाले की जांच वरीय आईएएस की अध्यक्षता में करवाने का वित्त विभाग का प्रस्ताव छलावा है. इससे साफ जाहिर है कि बड़ी मछलियों को बचाने की तैयारी शुरू हो गई है. प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि ट्रेज़री घोटाले की निष्पक्ष और और पारदर्शी जांच के लिए सीबीआई को जिम्मा सौंपा जाना चाहिए, तभी सच्चाई सामने आएगी.
प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि ट्रेज़री से निकासी और व्यय की अंतिम जिम्मेवारी एसपी की होती है, जिनकी ओर से डीएसपी (मुख्यालय) को डीडीओ का जिम्मा सौंप दिया जाता है. इसलिए संबंधित डीएसपी और एसपी की भूमिका की निष्पक्ष और गहन जाँच होनी चाहिए. साथ ही जैप -आईटी की भूमिका, पोर्टल में छेड़छाड़, फर्जी पे–आईडी निर्माण, बैंक खाता बदलना तथा कई तकनीकी खामियों पर जांच आवश्यक है. इसके लिए सीबीआई ही उपयुक्त एजेंसी है.
प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड सिपाही और क्लर्क को बताया जा रहा है, जो संभव नहीं लगता. यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं प्रतीत होता, बल्कि यह एक व्यापक और संगठित भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है. राज्य के कई जिलों में, पुलिस विभाग के माध्यम से 35 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी के मामले सामने आ रहे हैं. तथ्यों से स्पष्ट है कि यह घोटाला अधिक व्यापक और गहरा है. प्रवीण प्रभाकर ने झामुमो महासचिव विनोद पांडे के बयान पर हैरत जताया है जिसमें उन्होंने कहा है कि यह 14 वर्ष पुराना मामला है. सच तो यह है कि उस समय खुद हेमंत सोरेन वित्त मंत्री थे.
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