छोटे अस्पतालों को राहत की तैयारी, 50 बेड तक क्लिनिकल एक्ट से मिल सकती है छूट

छोटे अस्पतालों को राहत की तैयारी, 50 बेड तक क्लिनिकल एक्ट से मिल सकती है छूट

छोटे अस्पतालों को राहत की तैयारी 50 बेड तक क्लिनिकल एक्ट से मिल सकती है छूट

न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सरल और सुलभ बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा संकेत दिया है. गुरुवार को अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग अजय कुमार सिंह के साथ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन झारखंड के प्रतिनिधिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें छोटे अस्पतालों को राहत देने सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई.

क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में ढील की मांग
एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने 50 बेड तक के अस्पतालों, नर्सिंग होम और एकल क्लीनिक को क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट से छूट देने का अनुरोध किया. उनका कहना था कि वर्तमान में अस्पतालों को 27 बिंदुओं पर अनुपालन करना पड़ता है, जिसमें पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और फायर विभाग से एनओसी, बिल्डिंग मैप की स्वीकृति और सिविल सर्जन से पंजीकरण जैसी जटिल प्रक्रियाएं शामिल हैं.

इस पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि झारखंड के लिए अलग नियमावली तैयार की जाएगी. उसमें इस एक्ट से छूट देने पर विचार किया जाएगा. नियमों को आयुष्मान भारत- मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अनुरूप सरल बनाया जाएगा.

लंबित भुगतान पर 15 दिन में समाधान का आश्वासन
बैठक में एसोसिएशन ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत निजी अस्पतालों के दो माह से लंबित भुगतान का मुद्दा उठाया. इस पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि भुगतान का कार्य प्रोसेस में है. प्रयास किया जा रहा है कि अगले 15 दिनों में भुगतान जारी कर दिए जाएं.

ऑटो कैंसिल केस होंगे रिवाइव
प्रतिनिधिमंडल ने ऑटो कैंसिल केस के मामलों को पुनर्जीवित करने की मांग भी रखी. इस पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि जिला स्तर पर डीसी की अध्यक्षता वाली शिकायत निवारण समिति को सक्रिय किया जाएगा. ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि यदि उपायुक्त बैठक में भाग नहीं ले पाएं तो वह अपने किसी प्रतिनिधि को नामित कर दें ताकि बैठक नियमित होती रहे और शिकायतों का समाधान होता रहे. 

एचईएम पोर्टल 2.0 में राहत के संकेत
बैठक में नए आयुष्मान एचईएम पोर्टल 2.0 के तहत अस्पतालों को अप्रूवल में आ रही दिक्कतों का मुद्दा भी उठाया गया. विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिल्डिंग मैप अप्रूवल की शर्त को लेकर चिंता जताई गई. इस पर अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मुखिया या जिला पंचायत सदस्य से प्रमाणित मैप को मान्य किया जाएगा.

प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
आईएमए प्रतिनिधिमंडल में डॉ. विमलेश सिंह, डॉ. अजय कुमार सिंह (राज्य समन्वयक), प्रदीप सिंह (सचिव), डॉ. शंभू प्रसाद सिंह, डॉ. अनुपम सिंह (वीमेंस विंग अध्यक्ष) और डॉ. मृत्युंजय शामिल थे.

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