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रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) में प्रबंधकीय पदों (Managerial Positions) की बहाली प्रक्रिया को रद्द करने के फैसले को सही ठहराया है. न्यायाधीश दीपक रोशन की एकल पीठ ने शशिरंजन कुमार और 11 अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी प्रोजेक्ट के बंद हो जाने पर उम्मीदवारों को उस पद पर नियुक्ति पाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं रह जाता है.
क्या था पूरा मामला?
अभ्यर्थियों ने वर्ष 2022 में विज्ञापन संख्या JSLPS/HRD/FTE/001/21 के तहत विभिन्न परियोजनाओं के लिए आवेदन किया था. उन्होंने 24 और 25 सितंबर 2022 को आयोजित लिखित परीक्षा पास की और उसके बाद ग्रुप डिस्कशन (GD) व पर्सनल इंटरव्यू (PI) के चरण को भी पूरा कर लिया था. लंबे समय तक परिणाम घोषित न होने पर जब उम्मीदवारों ने आरटीआई (RTI) के माध्यम से जानकारी मांगी, तो पता चला कि पहले आदर्श चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) के कारण परिणाम रोका गया था. इसके बाद 6 मई 2025 को JSLPS प्रबंधन द्वारा पूरी चयन प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया गया. इस फैसले के खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था.
JSLPS और सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान JSLPS और राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जिन पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था, वे पूरी तरह अनुबंध पर आधारित और समय-बद्ध परियोजनाओं के लिए थे. बहाली प्रक्रिया में अत्यधिक देरी होने के कारण केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत चल रहे JOHAR, NRETP और MKSP प्रोजेक्ट्स जून 2023 से मई 2024 के बीच पूरे होकर बंद हो चुके हैं. प्रोजेक्ट्स के बंद होने और चयन एजेंसी में बदलाव के कारण प्रशासनिक कारणों से इस विज्ञापन को रद्द करना पड़ा.
हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी और फैसला
मामले के सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जेएसएलपीएस की कार्रवाई में कोई पक्षपात या मनमानापन नहीं है. कोर्ट ने इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न पुराने फैसलों का भी हवाला दिया. जब कोई विशिष्ट प्रोजेक्ट या योजना फंड की कमी या समय पूरा होने के कारण बंद हो जाती है, तो उसमें काम करने वाले या चयनित होने वाले कर्मियों का कोई स्थायी या निहित अधिकार (Vested Right) नहीं बचता.
चयन सूची में नाम आने या परीक्षा के विभिन्न चरणों को पार कर लेने मात्र से उम्मीदवार को नियुक्ति का अचूक अधिकार नहीं मिल जाता. सरकार या संस्था के लिए सभी विज्ञापित पदों को भरना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है, बशर्ते उनका निर्णय उचित कारणों पर आधारित हो. इन्हीं टिप्पणियों के साथ झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएलपीएस प्रबंधन के 6 मई 2025 के आदेश को सही मानते हुए अभ्यर्थियों की याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया.
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