आशिष शास्त्री/न्यूज11 भारत
सिमडेगा/डेस्क: अपने पुत्रों की लंबी आयु की कामना को लेकर माताओं ने कठिन व्रत जीवित्पुत्रिका विधि विधान से पूजा अर्चना कर संपन्न किया. सिमडेगा हनुमान वाटिका में आज सामूहिक रूप से जीवित्पुत्रिका पूजन विधि विधान के साथ किया गया.जहां आसपास की सभी व्रतधारी माताओं ने आकर पूजा अर्चना कर जीवितपुत्रिका व्रत की कथा सुना. पर्व को लेकर महिलाओं में गजब का उत्साह रहा. इस दौरान युवा से लेकर वृद्ध महिलाओं ने अपने बच्चों की कुशलता के लिए निर्जला व्रत रख पूजन किए. यहां पूजन अनुष्ठान पंडित सोमनाथ मिश्र द्वारा सम्पन्न कराया गया.परंपराओं की माने तो इस व्रत में महिलाओं द्वारा निर्जल 24 घंटे का निर्जला उपवास रख इस कठिन व्रत को करती हैं.
परंपरा विश्वास रखकर अपने पुत्र की लंबी आयु के लिए करती चली आ रही हैं. जीवित्पुत्रिका-व्रत के साथ जीमूतवाहन की कथा जुड़ी है. इसमें गन्धर्वों के राजकुमार जीमूतवाहन अपने जीवन का दाव पर लगाकर नागवंश की रक्षा करते हैं. जीमूतवाहन के अदम्य साहस से नाग-जाति की रक्षा हुई और तबसे पुत्र की सुरक्षा हेतु जीमूतवाहन की पूजा की प्रथा शुरू हो गई. जिसके बाद पुत्रवती महिलाएं जीमूतवाहन की पूजा करती हैं. आश्विन कृष्ण अष्टमी के दिन उपवास रखकर स्त्री जीमूतवाहन की पूजा कर तथा कथा सुनने के बाद आचार्य को दक्षिणा देते हुए पूजन अनुष्ठान संपन्न करती हैं और व्रत का पारण सोमवार को अष्टमी तिथि की समाप्ति के पश्चात किया जाएगा. इस व्रत के पारण में सभी माता साबुत अनाजों को निगल कर व्रत संपन्न करती हैं.
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