प्रमोद कुमार/न्यूज़11 भारत
बरवाडीह/डेस्क: सरकार द्वारा विलुप्त हो रहे आदिम जनजाति परिवारों को बचाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन बरवाडीह प्रखंड की छेचा पंचायत अंतर्गत पुटुआगढ़ गांव में रहने वाले कोरवा आदिम जनजाति परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन करने को मजबूर हैं. गांव में एक दर्जन से अधिक परिवारों के लगभग 100 से अधिक लोग निवास करते हैं, जो पिछले छह माह से पेयजल संकट की गंभीर समस्या झेल रहे हैं. ग्रामीणों को आधा से एक किलोमीटर दूर से पानी लाकर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है.
छह माह से जलमीनार है खराब
ग्रामीणों जितेंद्र कोरवा, दिनु कोरवा, अनिल कोरवा, बीरेंद्र कोरवा, अर्जुन कोरवा, सबिता देवी और रानी देवी सहित अन्य लोगों ने मंगलवार को भ्रमण कार्यक्रम के दौरान गांव पहुंचे जिला परिषद सदस्य संतोषी शेखर को अपनी समस्याओं से अवगत कराया. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लगा जलमीनार लगभग छह माह से खराब है. सूचना देने के बाद विभागीय कर्मी मशीन खोलकर ले गए, लेकिन दोबारा आकर उसे नहीं लगाया गया, जिससे पेयजल की समस्या लगातार बनी हुई है. मजबूरी में ग्रामीणों को दूर स्थित कुएं और नदी-नालों से पानी लाना पड़ रहा है.ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है. यदि पुटुआगढ़ स्कूल से गांव तक पक्की सड़क और पुलिया का निर्माण हो जाए, तो बरसात के दिनों में आवागमन की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है.
जिला परिषद सदस्य संतोषी शेखर ने समस्या को गंभीरता से लिया
ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जिला परिषद सदस्य संतोषी शेखर ने पेयजल विभाग के सहायक एवं कनीय अभियंता को अविलंब जल समस्या दूर करने का निर्देश दिया. साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि गांव की सड़क सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए विधायक रामचंद्र सिंह से पहल कर आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सफल होंगी, जब उन्हें धरातल पर उतारकर आदिम जनजाति परिवारों तक पहुंचाया जाएगा.
यह भी पढ़ें: चंदवा में हिंडाल्को चकला कोल माइंस क्षेत्र में 30 दिवसीय शिल्प प्रशिक्षण संपन्न, 50 महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर