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रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने भैरवा जलाशय परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. हाई कोर्ट ने निचली अदालत की ओर से तय किए गए 8,923 प्रति डिसमिल के मुआवजे के निर्धारण को रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट ने मामले को नए सिरे से सुनवाई और मुआवजा निर्धारित करने के लिए संबंधित अदालत में वापस भेज दिया है. मामले में हजारीबाग डीसी की ओर से दाखिल छह पहली अपीलों पर न्यायाधीश संजय प्रसाद की एकलपीठ में सुनवाई हुई.
9.27 एकड़ जमीन के अधिग्रहण का मामला
विवाद हजारीबाग (अब रामगढ़) जिले के डभातू गांव, थाना गोला की कुल 9.27 एकड़ जमीन के अधिग्रहण से जुड़ा है. यह जमीन भैरवा जलाशय परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी. जमीन मालिकों ने मुआवजे की दर को लेकर आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि जमीन उपजाऊ और खेती योग्य है तथा गोला क्षेत्र के नजदीक होने के कारण उसका बाजार मूल्य अधिक है. उन्होंने अधिक मुआवजे की मांग की थी. निचली अदालत ने तय किया था 8,923 प्रति डिसमिल जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए निचली अदालत ने 29 फरवरी 2012 के Judgment and Award के जरिए सभी संबंधित जमीन के लिए 8,923 प्रति डिसमिल की एक समान दर निर्धारित की थी. यह अवार्ड 15 मार्च 2012 को हस्ताक्षरित हुआ था. राज्य सरकार की ओर से इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई.
बिक्री विलेखों के मूल्य पर भी हुई चर्चा
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड में मौजूद जमीन की बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की. एक बिक्री विलेख, जो 28 जनवरी 2002 का था, उसमें 6.5 डिसमिल जमीन की कीमत ₹1,01,000 दर्ज थी, जो लगभग 15,538.46 प्रति डिसमिल बैठती है. इसी तरह 24 जनवरी 1992 के एक अन्य बिक्री विलेख में 2⅓ डिसमिल जमीन की कीमत 20,000 दर्ज थी, जो लगभग 8,695.65 प्रति डिसमिल थी. अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में वर्ष 2002 में जमीन की बिक्री से जुड़े कई लेन-देन मौजूद थे, लेकिन निचली अदालत ने इन आंकड़ों और संबंधित सरकारी दस्तावेजों का पर्याप्त और मामले के अनुरूप विश्लेषण नहीं किया.
पुराने फैसले पर अधिक निर्भरता पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने पाया कि निचली अदालत ने पहले के कुछ Land Reference मामलों में दिए गए फैसले पर काफी निर्भरता दिखाई, लेकिन वर्तमान मामलों में उपलब्ध बिक्री दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का स्वतंत्र रूप से पर्याप्त मूल्यांकन नहीं किया गया. अदालत ने विशेष रूप से Exhibit-A, Exhibit-C (Sale Chart) और Exhibit-D (Valuation Khatiyan) सहित रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री पर उचित विचार किए जाने की आवश्यकता बताई.
नए सिरे से तय होगा मुआवजा
हाईकोर्ट ने 29 फरवरी 2012 के Judgment and Award को रद्द करते हुए सभी छह अपीलों का निपटारा कर दिया. मामला दोबारा Civil Judge (Senior Division)-II-cum-Special Judge, Land Acquisition, Hazaribagh के पास भेजा गया है. निचली अदालत को निर्देश दिया गया है कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त होने के चार महीने के भीतर मामले पर नए सिरे से निर्णय लिया जाए.
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