पंकज कुमार/न्यूज11 भारत
घाघरा/डेस्क: घाघरा थाना क्षेत्र के बेलागाड़ा गांव में बीती रात आसमान से गिरे ओलों ने सिर्फ फसलें नहीं तोड़ीं, बल्कि किसानों के सपनों को भी चकनाचूर कर दिया। 17 एकड़ में फैली तरबूज, खरबूज और खीरे की लहलहाती फसलें कुछ ही मिनटों में तबाही के मंजर में बदल गईं। लेकिन बड़ा सवाल यह है हर साल आपदा के बाद भी क्यों नहीं जागता प्रशासन
ओलों की मार या सिस्टम की हार
- रात के अंधेरे में आई इस तबाही ने गांव को हिला दिया। सुबह जब किसान खेत पहुंचे, तो वहां मौत जैसी खामोशी थी चारों तरफ बर्बादी, ओलों की सफेद चादर और जमीन पर बिखरी टूटी फसलें।
- क्या मौसम की मार से ज्यादा खतरनाक प्रशासन की बेरुखी नहीं
- कर्ज लेकर बोए थे सपने अब क्या बेचें पीड़ित किसान जयहिंद बाड़ा
- किसान जय हिंद बाड़ा की आंखों में आंसू और आवाज में दर्द साफ झलकता है।
- 15 एकड़ में खेती की थी, 20 मजदूर के परिवार इसी पर निर्भर थे। कर्ज लेकर बीज डाले थे अब सब खत्म हो गया। यह सिर्फ एक किसान की कहानी नहीं, बल्कि पूरे बेलागाड़ा की हकीकत है।
लाखों का नुकसान
- फसल बर्बाद, आमदनी शून्य और सिर पर कर्ज किसान अब दोहरी मार झेल रहे हैं। हर साल प्राकृतिक आपदा आती है, लेकिन क्या प्रशासन ने कभी पहले से कोई ठोस इंतजाम किया? फसल बीमा योजना का लाभ क्यों नहीं पहुंचता गांव तक
- क्या राहत सिर्फ कागजों में ही सीमित है
- उबाल पर किसान
- गांव में किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। युवा और किसान अब चुप बैठने के मूड में नहीं हैं। साफ चेतावनी दी गई है
- आपदा के बाद ही क्यों जागता है सिस्टम
- क्या किसानों की मेहनत की कोई कीमत नहीं?
- मुआवजा योजना जमीन पर कब उतरेगी?
- अब नजर प्रशासन पर क्या मिलेगा इंसाफ
- या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा।
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