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पटना/डेस्क: झारखंड के बुढ़मू प्रखंड में मां सारदा की पूजा ने शुक्रवार को धार्मिक भक्ति का अनुपम संगम रचा. ठाकुरगांव में जहां दुर्गोत्सव की भव्यता वाली अनूठी परंपरा देखने को मिली—झारखंड की एकमात्र ऐसी जगह जहां वासंती पूजा इतने वैभव से मनाई जाती है—वहीं अन्य क्षेत्रों में स्कूलों व छोटे पंडालों में सरस्वती पूजा की सादगी भरी धूम मची. वातावरण में मंत्रों की गूंज, भजनों की लहरें और फूलों की वर्षा ने सभी को मां शारदा के दिव्य ज्योति में डुबो दिया.ठाकुरगांव का यह पावन स्थल, जहां मां भवानी का प्राचीन मंदिर आस्था का विश्वास माना जाता है, इस लिए दुर्गा पूजा ठाकुरगांव में नहीं होती, उसके जगह पर मां शारदे का पूजा दुर्गा पूजा की तरह सज-धजकर जगमगा उठा, हजारों भक्तों को आकर्षित कर रहा है. विशाल पंडालों में मंत्रोच्चार, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उत्सव को जीवंत बना दिया.
स्थानीय निवासी लोगों ने कहा, "यहां की भव्यता बंगाली परंपरा से प्रेरित है, जो झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करती है. मां की कृपा से विद्या व बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है."दूसरी ओर, बुढ़मू के स्कूलों ने सरस्वती पूजा को उत्साहपूर्वक मनाया. कस्तुरबा गांधी आवासीय विद्यालय, डीएवी बुढ़मू, रामकृष्णा एकेडमी, स्टार प्लस इंटरनेशनल स्कूल उमेडंडा, सनराइज स्कूल, राम मनोहर लोहिया हाई स्कूल, यूनिवर्सल पब्लिक स्कूल डढ़िया, आदिवासी बाल विकास विद्यालय,आरटीसी हाई स्कूल, तूरमुली सहित निजी व सरकारी संस्थानों में छात्रों ने सफेद वस्त्र धारण कर मां की आराधना की. सुबह से सड़कों पर छात्र मां शारदे के रंग में रंगे दिखे, हाथों में कमलगट्टा व किताबें थामे. जागृति विद्यालय के प्रधानाध्यापक बसंत महतो ने बताया, "यह पूजा छात्रों के लिए विद्या की देवी से प्रेरणा का अवसर है. परीक्षाओं से पहले मां का आशीर्वाद जरूरी है."पूजा के बाद प्रसाद वितरण और कलाकृतियों से माहौल को और भक्तिमय बनाया गया. स्थानीय पंडितों के अनुसार, वासंती पूजा विद्या, संगीत व कला की उज्ज्वलता का प्रतीक है. बुढ़मू की यह धार्मिक एकता क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है.
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