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कतरास/डेस्क: ईस्ट कतरास में कोयला परिवहन की व्यवस्था में ऐसी गड़बड़ी सामने आई है, जिसने बीसीसीएल अधिकारियों और ट्रांसपोर्ट कंपनी की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. दरअसल जिस साइडिंग का अधिकृत कांटा खराब पड़ा था वहां से कोयला लदे पांच हाईवा निकल गए और उनके चालान में कोयले का बकायदा सटीक वजन भी दर्ज था. सवाल यह है कि जब कांटा चला ही नहीं तो वजन हुआ कैसे और अगर वजन हुआ ही नहीं तो चालान में सटीक आंकड़े किसके कहने पर और किस आधार पर दर्ज किए गए.
जांच के घेरे में आये BCCL के अधिकारी
कतरास पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा केवल ट्रांसपोर्ट कंपनी तक सीमित नहीं है बल्कि बीसीसीएल एरिया-III के संबंधित जिम्मेदार अधिकारी भी कानूनी जांच के घेरे में हैं. प्राथमिकी में ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक और स्थानीय प्रबंधक के साथ बीसीसीएल के संबंधित पदाधिकारियों को भी आरोपित बनाया गया है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कोयले के वजन, चालान और परिवहन की पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर लापरवाही हुई और कहीं यह सुनियोजित तरीके से तो नहीं किया जा रहा था.
पुलिस के द्वारा मामले में बीएनएस की धारा 338, 336(2), 318(4), 340(2) और 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. वाहन मालिकों तथा विष्णु ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक और स्थानीय प्रबंधक के अलावा बीसीसीएल एरिया-III के संबंधित जिम्मेदार पदाधिकारियों को भी आरोपित किया गया है.
गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई
1 अक्टूबर, गुरुवार की रात पुलिस को सूचना मिली थी कि ईस्ट कतरास स्थित STG DEKO की साइडिंग से विष्णु ट्रांसपोर्ट कंपनी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना कोयला बाहर भेजा जा रहा है. सूचना में बीसीसीएल के स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों की कथित मिलीभगत से बिना अधिकृत कांटे पर वजन कराए कोयला परिवहन किए जाने और कोयले के ग्रेड में हेराफेरी की आशंका भी जताई गई थी.
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए भटमुड़ना मोड़ पर पांच हाईवा को रोका. सभी में कोयला लदा था और किसी भी वाहन पर त्रिपाल नहीं था. जाँच के दौरान हाईवा चालकों ने ट्रांसपोर्ट चालान फॉर्म-डी पेश किया.
चालकों ने पूछताछ में बताया कि कांटा खराब होने के कारण पेलोडर से संभावित वजन का अनुमान लगाकर हाईवा में कोयला लोड किया गया था.
कोयला लदे पांच हाइवा जब्त
दस्तावेज देखने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा हुआ कांटा खराब होने के बावजूद चालान में वजन आखिर कैसे दर्ज किया गया. पूछताछ के क्रम में प्रथमदृष्ट्या मामला संदिग्ध प्रतीत हुआ लिहाजा पुलिस ने सभी पाँच हाइवा को जब्त कर लिया. अब पुलिस यह जांच कर रही है कि यदि साइडिंग का कांटा खराब था तो बीसीसीएल की ओर से कोयले की निकासी की अनुमति किस आधार पर दी गई और बिना अधिकृत वजन के कोयला लदे वाहन साइडिंग से बाहर कैसे निकले. साथ ही अवैध चालान तैयार करने और उसे आगे भेजने की प्रक्रिया में बीसीसीएल के कौन कौन अधिकारी शामिल थे.
यही सवाल इस पूरे मामले को गंभीर बना रहे हैं. क्योंकि केवल ट्रांसपोर्ट कंपनी के स्तर पर वजन का अनुमान लगाकर कोयला भेजे जाने की स्थिति में भी यह पता लगाना जरूरी है कि बीसीसीएल की निगरानी व्यवस्था ने इसे रोका क्यों नहीं.
जांच में पांचों हाईवा बिना तिरपाल के कोयला परिवहन करते मिले. इससे रास्ते में कोयला गिरने और धूल उड़ने की लगातार मिल रही शिकायतों की भी पुष्टि होती है. स्थानीय स्तर पर पहले भी साइडिंग से बिना त्रिपाल कोयला ढोने की शिकायतें ग्रामीणों द्वारा को गई थी.
जब्त वाहनों में करीब 88 मीट्रिक टन कोयला
फिलहाल कतरास पुलिस ने पांचों हाईवा को कोयला समेत जब्त कर लिया है. जब्त वाहनों में करीब 88 मीट्रिक टन कोयला लदा था. JH10AB-8807 में करीब 18 टन, JH10AP-5045 में 17 टन, JH10AM-0193 में 17 टन, JH02AQ-3277 में 18 टन और JH10BQ-4058 में करीब 18 टन कोयला बताया गया है. पुलिस ने वाहनों को सुरक्षित रखकर कोयले और चालानों की जांच की. इसके बाद दस्तावेजों में दर्ज वजन, वास्तविक कोयले और परिवहन प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को जांच के दायरे में लिया गया.
जांच में जुटी पुलिस, उठ रहे कई गंभीर सवाल
अब पुलिस की जांच इस बात पर टिकी है कि कांटा खराब होने के बावजूद कोयले का सटीक वजन कैसे तय किया गया और साथ ही चालान किसने बनाया. अगर जांच में बीसीसीएल अधिकारियों और ट्रांसपोर्ट कंपनी के बीच किसी प्रकार का आपसी समन्वय या मिलीभगत सामने आती है तो यह मामला महज परिवहन नियमों के उल्लंघन का नहीं बल्कि कोयले की अवैध निकासी और दस्तावेजी प्रक्रिया में सुनियोजित हेराफेरी का मामला बन सकता है. फिलहाल मामले में पुलिस की जांच जारी है.
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