भूमि, मुआवजा और प्रबंधन की सुस्ती से जूझ रहा कोयलांचल, कोयला उत्पादन भी लक्ष्य से पीछे

भूमि, मुआवजा और प्रबंधन की सुस्ती से जूझ रहा कोयलांचल, कोयला उत्पादन भी लक्ष्य से पीछे

रैयतों की नाराज़गी बढ़ी, कई परियोजनाओं में काम प्रभावित

भूमि मुआवजा और प्रबंधन की सुस्ती से जूझ रहा कोयलांचल कोयला उत्पादन भी लक्ष्य से पीछे

मुमताज अहमद/न्यूज11  भारत

खलारी/डेस्क:  कोयलांचल क्षेत्र में इस वर्ष कोयला उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में पीछे चल रहा है, जो चिंता का विषय बनता जा रहा है. कोयला उत्पादन केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि यह संगठन की मजबूती, श्रमिकों के कल्याण और हजारों परिवारों की आजीविका से भी जुड़ा हुआ है. ऐसे में उत्पादन की रफ्तार धीमी होने से भविष्य में कल्याणकारी सुविधाओं, कार्य व्यवस्था और वेतन से जुड़े मुद्दों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
इसी बीच श्रमिकों से अपील की गई है कि वे अपने कार्यस्थलों पर पूरी लगन और जिम्मेदारी के साथ काम करें, सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए उत्पादन बढ़ाने में सहयोग दें और टीम भावना व अनुशासन बनाए रखते हुए संगठन को मजबूत बनाएं. उम्मीद जताई जा रही है कि श्रमिकों के सामूहिक प्रयास से उत्पादन लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा. दूसरी ओर क्षेत्र में भूमि, मुआवजा और नौकरी से जुड़े मामलों को लेकर रैयतों में असंतोष भी बढ़ता जा रहा है. रैयतों का कहना है कि सीसीएल उनकी जमीन तो ले ली जाती है, लेकिन उसके बदले नौकरी के लिए उन्हें वर्षों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. कई मामलों में नौकरी मिलने के बाद भी भूमि का मुआवजा रिटायरमेंट तक नहीं मिल पाता, जिससे ग्रामीणों में नाराज़गी बढ़ रही है. इसी कारण कई ग्रामीण अब अपनी जमीन देने से भी कतरा रहे हैं. वहीं विस्थापन निति के तहत विस्थापितो को दी जाने वाली सुविधाओं को सीसीएल और अंचल एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए विस्थापित को भय एवं घुटन भारी ज़िन्दगी जीने को मजबूर कर देते हैं,स्थानीय लोगों का कहना है कि सीसीएल की लचर व्यवस्था और प्रबंधन की सुस्ती के कारण कई परियोजनाओं में काम प्रभावित हो रहा है. प्रबंधन कई जगहों पर मजदूर संगठनों और रैयतों के बीच उलझता नजर आ रहा है. इसका असर सीसीएल के केडीएच परियोजना, पुरनाडीह परियोजना सहित अन्य परियोजना जैसे क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है, जहां भूमि और प्रबंधन से जुड़े विवादों के कारण उत्पादन कार्य प्रभावित होने की चर्चा है.
लोगों ने प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए यह भी आरोप लगाया कि कुछ सफेदपोश लोग केवल प्रबंधन की जी-हुजूरी में लगे हुए हैं, जबकि जमीनी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हो पा रही है. इससे रैयतों और श्रमिकों के बीच असंतोष और बढ़ रहा है.
क्षेत्र के लोगों का मानना है कि यदि भूमि, मुआवजा और रोजगार  एवं विस्थापितों , प्रभावितों की समस्यायों से जुड़े मामलों का समय पर समाधान किया जाए तथा प्रबंधन सक्रियता से काम करे, तो कोयलांचल में उत्पादन को नई गति मिल सकती है और क्षेत्र की समस्याओं का समाधान भी संभव हो सकेगा. अन्यथा भयावह स्थिति बनना लाजमी है.

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