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रांची/डेस्क: रिश्वत लेने के आरोप में करीब 19 वर्षों से ट्रायल का सामना कर रहे चैनपुर अंचल के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी ब्रजेश कुमार सिंह को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया. विजिलेंस की विशेष अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में उन्हें दोषमुक्त कर दिया. एसीबी ने 12 जनवरी 2007 को रिश्वत लेने के आरोप में ब्रजेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया था.
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अनिल सिंह महाराणा ने दलील दी कि सूचक के पिता को पहले ही पट्टा मिल चुका था. ऐसे में पट्टा दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप तथ्यात्मक रूप से सिद्ध नहीं होता. आरोप था कि स्थापना दिवस के अवसर पर पट्टा दिलाने के एवज में सूचक और उसके भाई से 16 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई थी. मामले में अभियोजन पक्ष ने सूचक समेत 16 गवाहों को अदालत में पेश किया. हालांकि, प्रस्तुत साक्ष्यों से रिश्वत लेने का आरोप प्रमाणित नहीं हो सका. इसके आधार पर अदालत ने ब्रजेश कुमार सिंह को बरी कर दिया.