अरुण कुमार यादव/न्यूज11 भारत
गढ़वा/डेस्क: गढ़वा सदर एसडीएम संजय कुमार के नियमित साप्ताहिक संवाद कार्यक्रम ‘कॉफी विद एसडीएम’ के तहत बुधवार को सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करने वाले तमाम शिक्षक संघों के पदाधिकारियों एवं शिक्षक प्रतिनिधियों के साथ संवाद आयोजित किया गया.कार्यक्रम में झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ, अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ, प्रगतिशील शिक्षक संघ, राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ, झारखंड प्लस टू शिक्षक संघ एवं झारोटेफ जैसे संगठनों के जिला अध्यक्षों ने मुखरता से शिक्षकों की समस्याओं को एसडीएम के समक्ष रखा. जिन पर यथासंभव आवश्यक पहल करने का भरोसा एसडीएम की ओर से दिया गया.
कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के इन शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार एवं सुझाव साझा किए.शिक्षकों ने इस संवाद कार्यक्रम में कई मुद्दों पर एसडीएम का ध्यान आकर्षित कराया. झारोटेफ के अध्यक्ष सुशील कुमार ने सुझाव दिया कि बच्चों को वर्ष में कम से कम दो बार शैक्षणिक भ्रमण और शैक्षणिक सेमिनार कराये जाएं, बच्चों के ड्रॉप आउट में अभिभावकों की उदासीनता दूर करने के लिए नवाचारी उपाय अपनाए जाएं. उन्होंने अनाथ बच्चों के लिए अनुमंडल स्तर पर विद्यालय की वकालत की.
सुनील दुबे ने प्राथमिक शिक्षकों की मध्यान्ह भोजन से जुड़ी समस्याओं को रखते हुए इसके चलते विद्यालय में उत्पन्न हो रहे गतिरोध के बारे में प्रकाश डाला. मेराल हाई स्कूल के शिक्षक संजय कुमार ने विद्यालय परिसर में शराबी, नशेड़ी और अन्य अराजक तत्वों के जमावड़े पर कार्रवाई का अनुरोध किया. चंद्रमौलिश्वर पांडे ने स्कूलों के शौचालयों की साफ सफाई, अरुण दुबे ने ऑनलाइन रिपोर्टिंग में आ रही समस्याओं, शिल्पी कुमारी ने चाइल्ड केयर, स्पेशल लीव तथा बच्चियों के लिए सेनेटरी नैपकिन की समस्याओं को रखा. वहीं नागेंद्र चौधरी ने कांडी प्लस टू उच्च विद्यालय की आंतरिक समस्याओं को रखा तथा प्रत्येक महीने में तीसरे शनिवार को शिक्षक समस्याओं को लेकर जिला स्तरीय शिविर आयोजित करने का अनुरोध किया.
प्रभात रंजन सिंह ने लेखा और वेतन भुगतान संबंधी कार्यालयी संस्कृति को लेकर अपना दर्द बयां किया. वहीं कुछ शिक्षकों ने गर्मी को देखते हुए आधा घंटा समय शिफ्ट करने का अनुरोध किया.संवाद के दौरान शिक्षकों ने विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं की स्थिति, शिक्षण कार्य में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों, छात्रों की उपस्थिति एवं शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रस्तुत किए. शिक्षक प्रतिनिधियों ने विद्यालयों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता, समय पर शैक्षणिक सामग्री, आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण तथा प्रशासनिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया.
उन्होंने बताया कि यदि इन क्षेत्रों में सुधार किया जाए तो शिक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकता है.बैठक में छात्रों के सर्वांगीण विकास, अनुशासन, नैतिक शिक्षा तथा सह-पाठयक्रम गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की गई. ज्यादातर शिक्षकों ने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों पर ध्यान अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं देते हैं, यहां तक कि वे लोग पैरंट्स टीचर मीटिंग भी नहीं आते हैं. उन्होंने इस मंच के माध्यम से सभी अभिभावकों से भी अनुरोध किया कि वे शिक्षकों से अपने बच्चों के बारे में अपडेट लेते रहें, क्योंकि शिक्षक और अभिभावक के संयुक्त प्रयास से ही बच्चे का व्यक्तित्व विकास होगा.
सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने सभी शिक्षक प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि शिक्षक, छात्र एवं विद्यालयों की आधारभूत व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आवश्यक पहल की जाएगी. उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भूमिका समाज निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनके सुझावों को प्राथमिकता के साथ लिया जाएगा.कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण एवं सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुआ.
शिक्षक प्रतिनिधियों ने इस प्रकार के संवादात्मक मंच की सराहना करते हुए कहा कि इससे उनकी समस्याओं को सीधे प्रशासन तक पहुंचाने का अवसर मिलता है. एसडीएम की ओर से भी यह स्पष्ट किया गया कि ‘कॉफी विद एसडीएम’ कार्यक्रम के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के साथ यह संवाद आगे भी निरंतर जारी रहेगा.
इस संवाद कार्यक्रम के दौरान कमलेश्वर पांडेय, सुशील कुमार, प्रभात रंजन सिंह, अरुण कुमार दुबे, सुनील कुमार दुबे, नागेंद्र चौधरी, संजय कुमार, मंसूर आलम, संजय कुमार उपाध्याय, राजाराम पासवान, कृष्ण मुरारी पांडेय, मार्कंडेय तिवारी, सैफुल्लाह अंसारी, चंद्र देव सिंह, अरविंद कुमार, दिलीप कुमार श्रीवास्तव, विवेक कुमार सिंह, चंद्र मौलिश्वर पांडेय, शिल्पी कुमारी आदि ने अपने-अपने विचार और सुझाव रखे.एसडीएम ने अंत में सभी शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि शिक्षक हमारी पीढियों का भविष्य गढ़ते हैं, साथ ही समाज को एक नई दिशा देते हैं. उनक योगदान को रेखांकित करते हुए उन्होंने सभी को अंग वस्त्र देकर सम्मानित भी किया.
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