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रांची/डेस्क: एशिया कप में रविवार को भारत और पाकिस्तान का बहुप्रतीक्षित मैच दुबई में खेला गया. इस मैच में भारत ने पाकिस्तान को अपने रुतबे के अनुसार 7 विकेट से बुरी तरह से हराया. मैच में हार-जीत एक अलग पहलू है, लेकिन मैच से पहले इस मैच को लेकर देश में जिस तरह की राजनीति हुई उस पर हैरानी जरूर हुई. लेकिन मैच के बाद टीम इंडिया के कप्तान ने शालीनता के साथ जो बयान दिया, वह मैच पर राजनीति करने वालों को करारा जवाब जरूर कहा जायेगा.
सिर्फ रविवार को ही नहीं, पिछले कई दिनों से विपक्षी नेताओं ने इस मैच को लेकर जो राग अलाप रखा था, उसे किसी भी सूरत में 'देश राग' तो नहीं कहा जा सकता है. इंडी गठबंधन की सभी पार्टियां केन्द्र सरकार के बहाने बीजेपी पर हमले कर रही थी कि भारत-पाकिस्तान मैच होने देने का वह 'देशद्रोह' कर रही है. जबकि इन पार्टियों के बयनों में राष्ट्रीयता कम राजनीति ही ज्यादा झलक रही थी. सभी पार्टियां मोदी सरकार के 'खून और पानी एक साथ नहीं चल सकता' को आधार बनाकर हमले कर रही थीं.
ठीक मैच के दिन राजद नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा था कि भाजपा का असली पार्टनर पाकिस्तान है. उन्होंने कहा था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा जाना चाहिए, जिन्होंने कभी अपनी रगों में सिंदूर बहने का दावा किया था. जो पहले सैन्य संघर्ष और सिंधु जल संधि को टालना पसंद करते हैं उनकी भाजपा अपनी सुविधा के अनुसार क्रिकेट खेलने के लिए कैसे तैयार हो गई है? उन्होंने तो यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान, भारतीय जनता पार्टी का 'साझेदार' है, क्योंकि दोनों सुविधा के अनुसार अपने रिश्ते बदलते हैं. तेजस्वी ने यह भी कहा कि कभी युद्ध विराम होता है, तो कभी भारत-पाकिस्तान के बीच मैच होता है, जबकि खून और पानी के रिश्ते खत्म होने की बात कही जाती है. यह विरोधाभास क्यों है? यहां यह भी बता दें कि तेजस्वी यादव ऐसी भाषा तब बोल रहे हैं जब कि वह कभी खुद भी क्रिकेटर रह चुके हैं.
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में कितनी समझदारी दिखायी इसका फैसला देश की जनता पर ही छोड़ दिया जाये, लेकिन कल मैच समाप्त होने के बाद टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने जो कुछ भी कहा. उसके तेजस्वी यादव जैसी सोच रखने वाले तमाम नेताओं की बोलती बन्द करने वाला जवाब जरूर कहा जा सकता है. क्योंकि सूर्यकुमार यादव के बयान में कहीं कोई राजनीति नहीं थी.
कप्तान सूर्यकुमार यादव ने पाकिस्तान पर सात विकेट की शानदार जीत को देश के सशस्त्र बलों को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि उनकी टीम पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के साथ है. सूर्यकुमार ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह एक बेहतरीन मौका है और हम पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ खड़े हैं और अपनी एकजुटता व्यक्त करते हैं. ‘मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम आज की जीत अपने सभी सशस्त्र बलों को समर्पित करना चाहते हैं जिन्होंने अदम्य साहस दिखाया और आशा करते हैं कि वे हमें प्रेरित करते रहेंगे. फिर उन्होंने यह भी कहा हम मैदान पर उन्हें मुस्कुराने का और भी कारण देंगे.’’
बता दें कि पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच यह पहला क्रिकेट मैच था. इससे पहले चैम्पियन्स ट्रॉफी में भी दोनों टीमें भिड़ी थीं, यह मैच भी तटस्थ देश यूएई में हुआ था. जबकि चैम्पियन्स ट्रॉफी का मेजबान पाकिस्तान था, लेकिन उसे अपने देश से दूर दूसरे देश में यह मैच खेलना पड़ा था. ऐसा नहीं है, कि उस समय भी विरोध करने वालों ने इस मैच का विरोध नहीं किया था, जबकि तब पहलगाम आतंकी हमले की छाया भी भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर नहीं पड़ी थी.
एक बात हर भारतीय और क्रिकेट फैंस भी समझता है कि सिर्फ मजे के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच मैच नहीं होना चाहिए. जब से भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते खराब हुए हैं तब से दोनों देशों के बीच कोई भी व्यक्तिगत सीरीज नहीं खेली गयी है. अगर व्यक्तिगत सीरीज के रूप में दोनों देशों के बीच मैच होते हैं तो इसके लिए बीसीसीआई और भारत सरकार दोनों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, लेकिन एशिया कप, विश्व कप, चैम्पियन्स ट्रॉफी, वर्ल्ड टेस्ट सीरीज में अगर इन दोनों के टकराने की नौबत आती है तो उससे इनकार करना 'आत्मसमर्पण' करने के जैसा होगा. इस बात को हर किसी को समझना होगा. हार-जीत तो अपनी जगह है.
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