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नई दिल्ली/रांची/डेस्क: हरिशरण देवनाथ द्वारा झारखण्ड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में कथित गड़बड़ी और धांधली के आरोपों की CBI द्वारा जांच के लिए दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई. याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जयमाल्या बालाजी और न्यायाधीश बी मोहना की बेंच ने सुनवाई की.
इसी मामले में कोशीलाल प्रसाद और अन्यों ने PGTTCE-2023 परीक्षा में नियोजन प्राप्त करने के लिए सिस्टम की हैकिंग के आरोप में एक हस्तक्षेप आवेदन (I.A) भी दायर किया है. इस मामले के आरोपियों की ओर से, अभिषेक राय, आकृती श्री, समीर रंजन (AoR - वात्सल्य विज्ञा) सुप्रीम कोर्ट में मौजूद थे. दावा किया गया कि झारखण्ड का सबसे बड़ा घोटाला PGTTCE-2023 है. लेकिन झारखण्ड सरकार द्वारा 17 अगस्त 2026 को JPSC और JSSC में हुए धांधली को लेकर लिए गए निर्णयों में PGT को न ही रद्द किया गया और न ही इसे जांच के दायरे में रखा गया.
अभय कुमार तिवारी, जिसे JPSC-JSSC के घोटाले का मास्टरमाइंड माना जाता है, वह पीजीटीटीसीई-2023 में भी शामिल हैं, और उसने खुद ही इस घोटाले का खुलासा किया है. लेकिन झारखण्ड सरकार PGT को हमेशा बचाने का प्रयास किया, जबकि शिक्षक ही भविष्य के निर्माता होते हैं (शिक्षक भर्ती परीक्षा में हुई धांधली को सरकार अनदेखा क्यों कर रही है). इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में JPSC-JSSC रिफार्म मंच की ओर से दो हस्तक्षेप याचिका भी दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है. यानी आने वाले 5 अक्टूबर को झारखण्ड के सभी अभ्यर्थी को सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का इंतजार रहेगा.
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