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रांची/डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने UPI के जरिये मनी ट्रांजैक्शन पर लगने वाले MDR शुल्क के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. हाल ही में केन्द्र सरकार ने 2,000 रुपए से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने का प्रावधान किया है. इसी पर तत्काल रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. लेकिन चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की बेंच ने इस पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया. मगर सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार से इस पर चार हफ्ते में जवाब देने को जरूर कहा है. केंद्र सरकार, RBI, NPCI और UPI स्टीयरिंग कमेटी को सुप्रीम कोर्ट के सवालों का जवाब देना है. बता दें कि ट्रांजैक्शन पर एमडीआर 15 अक्टूबर से लागू होना है.
सुप्रीम कोर्ट में उठे सवालों का केंद्र को देना है जवाब
- एमडीआर शुल्क को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति है, याचिकाकर्ता ने उन्हीं को कोर्ट में सवाल के रूप में उठाया है. याचिकाकर्ता की दलील है कि-
- यह ढांचा मनमाना और भेदभावपूर्ण है और पूरे देश पर वित्तीय बोझ डालता है.
- 2,000 रुपए की ट्रांजैक्शन सीमा 1 लाख रुपए की मासिक-प्राप्ति वर्गीकरण, अलग-अलग सेक्टर की दरें और 75,000 रुपए की अधिकतम सीमा जैसी वर्गीकरणों पर भी सवाल उठाए गए.
- 2,001 रुपए के ट्रांजैक्शन पर प्रतिशत के हिसाब से शुल्क की शुरुआत होती है,, जबकि 2,000 रुपए के ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं है.
- याचिकाकर्ता के अनुसार, अगर चार्ज लागू होते हैं तो भ्रष्टाचार बढ़ सकता है,
हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि बदले हुए फ्रेमवर्क का मकसद यूपीआई इकोसिस्टम को स्थिर और मजबूत बनाना है. केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि ग्राहकों के लिए यूपीआई मुफ्त रहेगा और व्यक्ति-से-व्यक्ति ट्रांजैक्शन भी मुफ्त रहेंगे.
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