सरकारी नियम

जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में लापरवाही पड़ेगी भारी, बिना मजिस्ट्रेट की मंजूरी नहीं बन पाएगा सर्टिफिकेट, मुसीबत अलग

सबसे अच्छा होगा 21 दिनों के अन्दर करवा लें रजिस्ट्रेशन, अधिसूचना हो चुकी जारी, 1 अक्टूबर हो नियम लागू

By : News11 Bharat , Pramod Kumar
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में लापरवाही पड़ेगी भारी, बिना मजिस्ट्रेट की मंजूरी नहीं बन पाएगा सर्टिफिकेट, मुसीबत अलग

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: अभिभावकों को अपने बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में लापरवाही अब भारी पड़ने वाली है. केन्द्र सरकार ने नियम तय कर दिए हैं औरवे 1 अक्टूबर, 2026 से लागू हो जाएंगे. अब तक यही होता रहा है कि अभिभावक अपने बच्चों के  जन्म-प्रमाण पत्र बनवाने में सुस्ती बरतने के बाद इधर-उधर भागदौड़ कर, पुराने दस्तावेजों का जुगाड़कर, पैरवी लगाकर प्रमाण-पत्र बनवा लेते हैं. लेकिन अब उनकी यह लापरवाही उन पर भारी पड़ने वाली है. क्योंकि सरकार ने नया नियम लागू कर दिया है, जो 1 अक्टूबर से प्रभावी हो जाएगा.

अब कितना कठिन होने वाला है जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाना

  • 0-21 दिनों के अन्दर रजिस्ट्रेशन सबसे अच्छा
  • सीधे हॉस्पिटल/नगर निगम/पंचायत के रजिस्ट्रार के पास सूचना देकर रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है
  • कोई फीस नहीं लगेगी, किसी मजिस्ट्रेट की जरूरत नहीं होगी

21-30 दिन के अन्दर थोड़ी-सी परेशानी

  • रजिस्ट्रार के पास ही आवेदन देना होगा
  • थोड़ी सी लेट फीस देनी होगी
  • देर होने के कारण एफिडेविट/शपथपत्र देना पड़ सकता है

30 दिन से 1 साल का समय बीतने पर बढ़ने लगेगी परेशानी

  • रजिस्ट्रार के पास लिखित आवेदन देना होगा
  • रजिस्ट्रेशन में क्यों देरी हुई उसका कारण बताना होगा।
  • रजिस्ट्रार पहले खुद वेरिफिकेशन करेगा, लेट फीस लेकर रजिस्टर कर देगा

1 साल से 2 साल तक विलम्ब होने पर और बढ़ेगी परेशानी

  • 1 साल से ज्यादा देरी पर पहले सीधे Judicial Magistrate के पास जाना पड़ता था, अब ऐसा नहीं होगा
  • अब DM/SDM द्वारा अधिकृत Executive Magistrate का आदेश रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी होगा
  • मजिस्ट्रेट पहले तथ्यों का सत्यापन करेगा, उसके बाद ही आदेश देगा
  • निर्धारित शुल्क देना होगा, तब रजिस्ट्रेशन होगा

2 साल से ज्यादा देरी होने सबसे बड़ी मुसीबत

  • रजिस्ट्रेशन के लिए Judicial Magistrate First Class का आदेश अनिवार्य होगा
  • मजिस्ट्रेट पहले को घटना की सत्यता का वेरिफिकेशन करेगा
  • कोर्ट की प्रक्रिया, शपथपत्र, गवाह, अस्पताल का रिकॉर्ड, आंगनवाड़ी/ टीकाकरण कार्ड जैसे सुबूतों की आवश्यकता हो सकती है
  • पहले 1 साल से ज्यादा देरी पर सीधे Judicial Magistrate जाना पड़ता था। अब नहीं।अब DM / SDM / DM द्वारा अधिकृत Executive Magistrate का आदेश चाहिए।मजिस्ट्रेट पहले तथ्यों का सत्यापन करेगा, फिर आदेश देगा।निर्धारित शुल्क देना होगा।

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