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रांची/डेस्क: दुनिया के कई शहरों में नो-स्मोकिंग जोन आम बात है लेकिन कुछ जगहों पर यह नियम इतना सख्त हो चुका है कि एक कश भी आपको कानूनी मुसीबत में डाल सकता हैं. ऐसा ही एक शहर है बर्नबी, जहां सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान करना सीधे तौर पर अपराध की श्रेणी में आता हैं. यहां प्रशासन का फोकस साफ है- स्वच्छ हवा और स्वस्थ नागरिक. कनाडा में स्थित यह शहर अपने कड़े एंटी-स्मोकिंग कानूनों के लिए जाना जाता हैं. पार्क, बीच, खेल के मैदान, यहां तक कि गोल्फ कोर्स भी पूरी तरह धूम्रपान मुक्त हैं. बेंच पर बैठकर सिगरेट पीना भी नियमों का उल्लंघन माना जाता हैं.
6 मीटर का नो-स्मोकिंग दायरा
बर्नबी में नियम सिर्फ खुले स्थानों तक सीमित नहीं हैं. किसी भी बिल्डिंग के दरवाजे, खिड़की या वेंटिलेशन एरिया से 6 मीटर (करीब 20 फीट) के भीतर स्मोकिंग करना गैरकानूनी हैं. खास बात यह है कि यहां ई-सिगरेट (वेपिंग) और पारंपरिक सिगरेट- दोनों पर समान नियम लागू होते हैं.
निगरानी और भारी जुर्माना
नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए शहर के विशेष Bylaw Officers तैनात रहते हैं. सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी होती हैं. नियम तोड़ने पर 100 से 500 कनाडाई डॉलर तक का जुर्माना लगाया जाता हैं. यही सख्ती इस शहर को नो-स्मोकिंग मॉडल बनाती हैं. सिटी काउंसिल का मानना है कि सिगरेट फिल्टर न केवल कचरा बढ़ाते है बल्कि माइक्रोप्लास्टिक का बड़ा स्रोत भी है, जो वर्षों तक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं. इसके अलावा सेकेंड हैंड स्मोकिंग से होने वाली बीमारियों को रोकना भी इस नीति का मुख्य उद्देश्य हैं. इन सख्त नियमों का असर साफ दिख रहा हैं. शहर के पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर सिगरेट से होने वाले कचरा में करीब 70% तक कमी दर्ज की गई हैं.
कई और शहर सख्त
बर्नबी अकेला नहीं है, जो धुएं के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा हैं. मेक्सिको ने साल 2023 में बेहद सख्त एंटी-स्मोकिंग कानून लागू किए, जहां पर्यटन स्थलों तक पर प्रतिबंध हैं. वहीं भूटान में तंबाकू बिक्री पर ही रोक लगाई जा चुकी है और सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान करने पर जेल तक का प्रावधान हैं. न्यूजीलैंड भविष्य की पीढ़ियों के लिए सिगरेट खरीदना असंभव बनाने की दिशा में काम कर रहा हैं.
क्या भारत में संभव है ऐसा मॉडल?
भारत के महानगरों में बढ़ती आबादी और भीड़ के कारण पूरे शहर को स्मोक-फ्री-बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है लेकिन एक्सपर्ट्स मानते है कि शुरुआत पब्लिक पार्कों, सरकारी दफ्तरों और कमर्शियल जोन से की जा सकती हैं. बर्नबी का मॉडल यह साबित करता है कि मजबूत इच्छाशक्ति और सख्ती कानूनों के जरिए साफ हवा हासिल की जा सकती हैं. यह सिर्फ नियम नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम हैं.
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