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रांची/डेस्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के ठीक 12 दिन पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद जिलावार अंतिम सूची जारी कर दी गयी है. चुनाव आयोग ने जो अंतिम सूची जारी की गयी है, उसमें से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गये हैं. पूरे देश में जितने भी राज्यों का अब तक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण हुआ है, उनमें सबसे ज्यादा लम्बा समय पश्चिम बंगाल में ही लगा है. बंगाल में SIR का काम 3 चरणों में पूरा हुआ है.
तीन चरणों में सूची से इस तरह से हटाये गये मतदाताओं के नाम
- चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के बाद सबसे पहले दिसंबर 2025 में जो प्रारंभिक मसौदा पेश किया था, उसमें 58.2 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गये थे.
- प्रारम्भिक सूची जारी होने के बाद उस पर आपत्तियों का चुनाव आयोग ने समाधान करने के फिर एक सूची जारी की गई, उसमें 5.46 लाख लोगों के और नाम हटाए गए थे.
- पश्चिम बंगाल की एसआईआर प्रक्रिया में इसके बाद भी कई पेंच सामने आये और मामला कलकत्ता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक गया. सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप पर न्यायिक अधिकारियों ने सूची का गहन अध्ययन किया. इसके बाद उन्होंने 27 लाख से अधिक नाम हटाकर अंतिम सूची जारीकर दी है. इस प्रकार अब तक कुल जितने नाम हटाए गये हैं, उनकी संख्या करीब 91 लाख पहुंच गई है. इनमें सबसे ज्यादा नाम मुर्शिदाबाद में हटाए गये हैं. न्यायिक जांच के बाद 4.55 लाख मतदाताओं के नाम मुर्शिदाबाद से हटाए गए हैं. उत्तर 24 परगना में 3.25 लाख और मालदा में 2.39 लाख नाम हटाए गए हैं. बता दें कि एसआईआर से पहले राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 7,66,37,529 थी, जिनमें 90,83,345 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. यानी अंतिम सूची में अब कुल मतदाता 6,75,54,184 बच गये हैं.
91 लाख मतदाताओं के हटाए जाने का लाभ किस पार्टी को होगा
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल होने वाले हैं. पहले चरण में 152 और दूसरे चरण में 142 सीटों पर मतदान होगा. जिसके परिणाम 4 मई को आएंगे. एसआईआर में भारी मात्रा में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद अब यह बहस छिड़ गयी है कि आखिर इसका फायदा किसको होगा. क्योंकि अधिकांश मतदाताओं के नाम उन स्थानों के हटे हैं जो अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र हैं. इससे कहा तो यह जा रहा है कि इसका फायदा बीजेपी को ज्यादा हो सकता है. क्योंकि विपक्ष का यही कहना है कि बीजेपी ने अपने फायदे के लिए एसआईआर को प्रोपेगंडा खड़ा किया है. दूसरी ओर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के माथे पर इस एसआईएक को लेकर चिंता की लकीरें जरूर खिंच गयी है, लेकिन इसके बाद भी उन्हें भरोसा है कि वह एक बार फिर सत्ता में आयेंगी. क्योंकि उनके वोटर ही उनकी ताकत हैं और वे बीजेपी के मंसूबे पूरे नहीं होने देंगे.
यहां एक बात बताना भी जरूरी है कि मतदाता सूची में जो भी नाम हटाए गये हैं, वह यूं ही नहीं हटाए गये हैं. वर्षों से मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम नहीं होने के कारण इसमें ढेरों ऐसे मतदाताओं के नाम शामिल रह गये थे जो या तो अब इस दुनिया में नहीं हैं, या अब अपने राज्य में नहीं है, या भले ही वे अपने राज्य से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनका नाम दूसरे राज्य की मतदाता सूची में है.
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