संतोष श्रीवास्तव/न्यूज 11 भारत
पलामू/डेस्क: पलामू प्रक्षेत्र के डीआईजी नौशाद आलम ने न्यायिक प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने पलामू, गढ़वा और लातेहार जिले के उपायुक्तों को एक पत्र भेजा है, जिसमें पोस्टमार्टम और मेडिकल रिपोर्ट को समय पर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. पलामू डीआईजी का मानना है कि इन रिपोर्टों में देरी से गंभीर आपराधिक मामलों की जाँच प्रभावित हो रही है.
जांच और चार्जशीट में देरी की वजह
डीआईजी ने अपने पत्र में कहा है कि पुलिस को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत गंभीर अपराधों में 90 दिनों और अन्य मामलों में 60 दिनों के भीतर अपनी जाँच पूरी करके चार्जशीट दाखिल करनी होती है. लेकिन, जिला अस्पतालों से पोस्टमार्टम और इंजरी रिपोर्ट मिलने में होने वाली देरी के कारण यह समय सीमा का पालन करना मुश्किल हो रहा है. इसके परिणामस्वरूप, आपराधिक मामलों की जाँच समय पर पूरी नहीं हो पाती है, जिससे न्याय व्यवस्था में बाधा आ रही है और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने में विलंब होता है.
अनावश्यक रूप से रांची रेफर किए जा रहे मामले
डीआईजी ने एक और बड़ी समस्या पर ध्यान आकर्षित किया है. उन्होंने बताया कि कई ऐसे मामले, जिनका पोस्टमार्टम जिला अस्पतालों में आसानी से किया जा सकता है, उन्हें भी अनावश्यक रूप से रांची रेफर कर दिया जाता है. इस प्रक्रिया से न केवल पुलिस और सरकारी संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि पीड़ित परिवारों को भी बेवजह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
इस समस्या को हल करने के लिए, डीआईजी नौशाद आलम ने तीनों जिलों के उपायुक्तों से अनुरोध किया है कि वे अपने-अपने सिविल सर्जन को निर्देश दें. इन निर्देशों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं-
- सभी पोस्टमार्टम और इंजरी रिपोर्ट थानों को निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाए.
- केवल उन्हीं मामलों को रांची रेफर किया जाए जो वास्तव में चिकित्सकीय रूप से आवश्यक हों.
- डीआईजी ने जोर दिया है कि ये कदम जनता को शीघ्र और प्रभावी न्याय दिलाने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं.