न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना - पटना में नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में बड़ा मोड़ आया है। शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन, जो इस केस में साक्ष्य मिटाने के आरोप में जेल में बंद थे, उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई है। इस फैसले के बाद एक बार फिर पूरे मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
हाईलाइट्स :
- शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन को कोर्ट से जमानत मिली
- साक्ष्य मिटाने के आरोप में था जेल में बंद आरोपी
- डिफॉल्ट बेल को लेकर कोर्ट में चली तीखी बहस
- 90 दिन की समयसीमा और चार्जशीट दाखिल न होने पर मिला राहत
- छात्रा की संदिग्ध मौत ने हॉस्टल सुरक्षा पर खड़े किए बड़े सवाल
- पीड़ित परिवार अब भी न्याय की लड़ाई में जुटा
कोर्ट रूम में तेज हुई कानूनी जंग
इस मामले में जमानत को लेकर अदालत में जबरदस्त बहस देखने को मिली। मनीष रंजन के वकीलों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 187(2) का हवाला देते हुए “डिफॉल्ट बेल” की मांग की। उनका तर्क था कि आरोपी पिछले 90 दिनों से जेल में है, लेकिन पुलिस अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई है, जो कानूनन आरोपी को जमानत का अधिकार देता है।
वहीं, विशेष लोक अभियोजक सुरेश चंद्र प्रसाद और पीड़िता के वकील एस.के. पांडेय ने इस दलील का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत में स्पष्ट किया कि आरोपी को हिरासत में लिए अभी 90 दिन पूरे नहीं हुए हैं, बल्कि केवल 89 दिन ही हुए हैं। इस आधार पर उन्होंने डिफॉल्ट बेल का विरोध किया। शुरुआत में अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को सही मानते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन बाद में कानूनी प्रक्रियाओं और समय-सीमा की व्याख्या के आधार पर मनीष रंजन को जमानत मिल गई। इस फैसले ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
रहस्यमयी हालात में मिली थी छात्रा
यह पूरा मामला 9 जनवरी का है, जब पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र में यह घटना सामने आई थी। छात्रा अपने हॉस्टल के कमरे में संदिग्ध हालत में बेहोश पाई गई थी। सूचना मिलने पर उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मृतका के पिता ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि उनकी बेटी के शरीर पर चोट के निशान थे और उन्होंने हॉस्टल मालिक पर शारीरिक शोषण की कोशिश का शक जताया था। इसी आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
परिवार की न्याय की लड़ाई जारी
पीड़ित परिवार के लिए यह मामला सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि उनकी बेटी के लिए इंसाफ की लड़ाई है। छात्रा डॉक्टर बनने का सपना लेकर पटना आई थी और नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थी। उसकी असमय मौत ने न सिर्फ परिवार को तोड़ दिया, बल्कि हॉस्टलों में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच एजेंसियों पर बढ़ा दबाव
कोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब जांच एजेंसियों पर दबाव और बढ़ गया है। पुलिस को जल्द से जल्द पुख्ता साक्ष्यों के साथ चार्जशीट दाखिल करनी होगी, ताकि मामले का ट्रायल शुरू हो सके और दोषियों को सजा मिल सके।
इस केस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बड़े शहरों में रहकर पढ़ाई करने वाली छात्राओं की सुरक्षा कितनी मजबूत है और प्रशासन इस दिशा में कितनी गंभीरता से काम कर रहा है।
सुरक्षा और सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि एक सामाजिक चेतावनी भी है। हॉस्टलों की निगरानी, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर अब सख्त कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
(यह मामला अब भी जांच के दायरे में है और कोर्ट में आगे की सुनवाई के साथ कई अहम तथ्य सामने आने की संभावना है।)
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