न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार ने कहा कि न तो कोई राज्य और न ही सर्कार राष्ट्रपति और राज्यपाल की विधेयकों पर कार्यवाई के खिलाफ याचिका दायर कर सकती हैं. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू यह जानना चाहती हैं कि क्या राज्यों को अनच्छेद 32 के तहत मल अधिकारों के उल्लंघन का हवाला देकर याचिका दायर करने का अधिकार हैं.
राष्ट्रपति और राज्यपाल को विधेयकों पर कार्यवाई करने के लिए समय सीमा तय की थी
चीफ जस्टिस बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही हैं. यह संदर्भ राष्ट्रपति ने उस समय भेजा था जब सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राष्ट्रपति और राज्यपाल को विधेयकों पर कार्यवाई करने के लिए समय सीमा तय की थी.
सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों पर प्रतिबंध लगाते
तुषार मेहता ने कहा है कि संविधान में कुछ प्रावधान ऐसे हैं, जो सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों पर प्रतिबंध लगाते हैं. अनुच्छेद 32 का प्रयोग सिर्फ नागरिकों या व्यक्तियों के मूल अधिकारों की रक्षा के लिए किया जा सकता हैं. चूंकि राज्य के पास कोई मूल अधिकार नहीं है, वह अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर नहीं कर सकता हैं. अनुच्छेद 361 राष्ट्रपति और राज्यपाल को उनके कार्यों के लिए अदालतों के प्रति जवाबदेह न होने की संवैधानिक प्रतिरक्षा देता हैं.
तमिलनाडु का विरोध
केंद्र के रुख का तमिलनाडु सरकार ने विरोध किया और कहा गया कि राज्यपाल किसी विधेयक को अनिश्चित काल तक रोक नहीं सकते. राज्य ने तर्क दिया है कि केंद्र 1975 के शमशेर सिंह बनाम पंजाब राज्य मामले की गलत व्याख्या कर रहा हैं.