न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार के नवादा जिले में जंगली हाथियों का आतंक अब जानलेवा हो चुका है। रविवार की सुबह गोविंदपुर थाना क्षेत्र के आनंद नगर मोहल्ले में एक जंगली हाथी ने 60 वर्षीय बुजुर्ग बच्चू राम को बड़ी ही बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में कोहराम मच गया है और ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
सुबह के अंधेरे में काल बनकर आया गजराज
मृतक बच्चू राम रविवार तड़के घर से बाहर निकले थे, तभी अचानक पीछे से आए एक विशालकाय हाथी ने उन पर हमला कर दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, हाथी ने बुजुर्ग को अपनी सूंड से उठाकर हवा में उछाला और फिर जमीन पर पटक-पटक कर पैरों से कुचल दिया। बच्चू राम की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
हाथी का तांडव
एक महीने में तीन मौतें: खौफ के साये में ग्रामीण
नवादा का रजौली और गोविंदपुर इलाका पिछले एक महीने से हाथियों के निशाने पर है। अब तक तीन लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। माधोपुर गांव सहित कई इलाकों में हाथियों का झुंड न सिर्फ लोगों की जान ले रहा है, बल्कि घरों को ध्वस्त कर फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर रहा है। ग्रामीण अब सूरज ढलने के बाद घरों से निकलने में भी कतरा रहे हैं।
सिर्फ शोर मचाता है वन विभाग—सड़क जाम कर लोगों ने किया प्रदर्शन
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शव को सड़क पर रखकर जमकर नारेबाजी की गई और यातायात बाधित किया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वन विभाग के पास हाथियों को भगाने के लिए न तो कोई पुख्ता ट्रेनिंग है और न ही रेस्क्यू प्लान। विभाग के कर्मी सिर्फ शोर मचाकर कोरम पूरा करते हैं, जिसके कुछ ही घंटों बाद हाथी दोबारा गांव में घुस आते हैं।
प्रदर्शन करते लोग
क्यों भटक रहे हैं हाथी? क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों के अनुसार, ये हाथी झारखंड के जंगलों से भटककर भोजन की तलाश में बिहार की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं। जंगलों का कटना और रिहायशी इलाकों में फसलों की आसान उपलब्धता हाथियों को गांवों की ओर खींच रही है। फिलहाल, वन विभाग हाथियों को वापस जंगल में खदेड़ने का दावा कर रहा है, लेकिन स्थानीय लोग अब 'स्थायी समाधान' की मांग पर अड़े हैं।