न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पूजा शर्मा / पटना - शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत बिहार में निजी विद्यालयों में कमजोर वर्ग एवं अलाभकारी समूह के बच्चों के नामांकन को लेकर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। इस संबंध में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में नामांकन प्रक्रिया की प्रगति, तकनीकी समस्याओं और लंबित मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई।
हाईलाइट्स:
- RTE के तहत निजी स्कूलों में 25% सीटों पर एडमिशन की समीक्षा
- सभी स्कूलों को 13 अप्रैल तक Intake Capacity पोर्टल पर भरना अनिवार्य
- 1,949 स्कूलों को मंजूरी, 417 आवेदन अभी भी लंबित
- अब तक 56,573 बच्चों का एडमिशन, 8,186 सीटें खाली
- बिना ठोस कारण एडमिशन से इनकार नहीं कर सकते स्कूल
- RTE के तहत 200.71 करोड़ रुपये DBT के जरिए जारी
- तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए वीडियो गाइड जारी
RTE के तहत 25% सीटों पर नामांकन की समीक्षा
बैठक की अध्यक्षता निदेशक, प्राथमिक शिक्षा, शिक्षा विभाग, बिहार सरकार ने की। इस दौरान सत्र 2026-27 के लिए RTE की धारा 12(1)(c) के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर हो रहे नामांकन की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि सभी पात्र बच्चों को समय पर प्रवेश मिल सके।
13 अप्रैल डेडलाइन: डेटा नहीं भरा तो कार्रवाई तय
सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे 13 अप्रैल 2026 तक अपनी Intake Capacity अनिवार्य रूप से RTE पोर्टल पर अपडेट करें। स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि समय सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाले स्कूलों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में जानकारी दी गई कि 14 जनवरी से 8 अप्रैल 2026 के बीच 1,949 निजी विद्यालयों को प्रस्वीकृति दी जा चुकी है। वहीं 417 विद्यालयों के आवेदन 90 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। इन सभी लंबित आवेदनों का निष्पादन अप्रैल माह के भीतर करने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया है।
ग्राउंड जांच के बाद ही मिलेगी मान्यता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिला एवं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी स्थलीय जांच के बाद ही किसी विद्यालय के आवेदन को आगे बढ़ाएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सभी प्रस्वीकृतियां निर्धारित मानकों के अनुरूप ही दी जाएं।नामांकन के आंकड़ों के अनुसार, रैंडमाइजेशन के जरिए आवंटित बच्चों में से अब तक 56,573 बच्चों का प्रवेश कराया जा चुका है। हालांकि, 8,186 बच्चों का नामांकन अब भी लंबित है। सभी निजी विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे इन लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करें।
बिना ठोस कारण एडमिशन से इनकार नहीं
विद्यालयों को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे दूरी या अन्य सामान्य कारणों का हवाला देकर नामांकन से इनकार नहीं कर सकते। केवल दस्तावेजों में गड़बड़ी या अभिभावक के लिखित अनुरोध की स्थिति में ही प्रवेश अस्वीकार किया जा सकेगा। सरकार ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2019-20 से 2023-24 तक RTE के तहत नामांकित बच्चों के लिए निजी विद्यालयों को DBT के माध्यम से 200.71 करोड़ रुपये की राशि दी जा चुकी है। अरवल, पूर्वी चंपारण, रोहतास, सहरसा और शेखपुरा जिलों में 100% भुगतान पूरा हो चुका है, जबकि अन्य जिलों में प्रक्रिया जारी है।
तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए वीडियो गाइड
कई स्कूलों ने शिकायत की कि भौतिक रूप से नामांकन लेने के बावजूद पोर्टल पर स्थिति लंबित दिख रही है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने Intake Capacity और नामांकन प्रक्रिया से संबंधित एक विस्तृत वीडियो गाइड तैयार कर सभी विद्यालयों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इस महत्वपूर्ण बैठक में उप निदेशक प्राथमिक शिक्षा उर्मिला कुमारी, उप निदेशक जनसंपर्क दिनेश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और उन्होंने प्रक्रिया को पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
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