न्यूज 11 भारत/ बिहार डेस्क
सावन कुमार / राजनीतिक रिपोर्ट पटना:– बिहार की राजनीति में एक बार फिर वाल्मीकि नगर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हालिया राजनीतिक कदमों और उनके पुराने पैटर्न को देखते हुए यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या एक बार फिर बड़े सियासी बदलाव की भूमिका तैयार हो रही है।
वाल्मीकि नगर: जहां से शुरू होती है नीतीश कुमार की बड़ी राजनीति?
उत्तर बिहार के वाल्मीकि नगर को लेकर राजनीतिक हलकों में लंबे समय से यह धारणा बनी हुई है कि यहीं से नीतीश कुमार अपने बड़े राजनीतिक अभियानों की शुरुआत करते हैं, जिसके बाद राज्य की सत्ता और गठबंधन समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिलता रहा है।
हाइलाइट्स
- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बगहा दौरा
- रविवार को वाल्मीकिनगर का कर सकते हैं दौरा
- सीएम के संभावित कार्यक्रम को लेकर प्रशासन अलर्ट
वाल्मीकि नगर: जहां से शुरू होती है नीतीश कुमार की बड़ी राजनीति?
2024 की प्रगति यात्रा और राजनीतिक संकेत
दिसंबर 2024 में शुरू हुई ‘प्रगति यात्रा’ का आगाज भी वाल्मीकि नगर से ही किया गया था। इस दौरान कुछ प्रमुख एनडीए नेताओं और दोनों उप-मुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दिया था। कई विश्लेषकों ने इसे गठबंधन के भीतर बढ़ती दूरी के संकेत के रूप में देखा था।
2023 की समाधान यात्रा और विदाई की अटकलें
जनवरी 2023 में शुरू हुई ‘समाधान यात्रा’ भी वाल्मीकि नगर से ही शुरू हुई थी। उस समय विपक्षी दलों ने इसे “विदाई यात्रा” तक करार दिया था। हालांकि, उस दौर में भी नीतीश कुमार ने राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से साधने में सफलता हासिल की थी।
राजनीतिक बदलावों का पुराना पैटर्न
बिहार की राजनीति में यह धारणा मजबूत रही है कि जब भी नीतीश कुमार ने वाल्मीकि नगर से किसी बड़े अभियान की शुरुआत की है, उसके बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उदाहरण के तौर पर, 2024 की शुरुआत में उनका फिर से National Democratic Alliance में लौटना इसी राजनीतिक उतार-चढ़ाव की कड़ी माना जाता है।
नीतीश कुमार का अगला कदम क्या बड़ा धमाका लाएगा ?
2026 की नई चर्चा: राज्यसभा और संभावित बदलाव
वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम (अप्रैल 2026) के अनुसार, नीतीश कुमार द्वारा बिहार विधान परिषद से इस्तीफा देने और राज्यसभा जाने की चर्चा ने नई बहस छेड़ दी है। इसे उनके सक्रिय राज्य राजनीति से संभावित ‘एग्जिट प्लान’
के तौर पर देखा जा रहा है।
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