न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क: बांका जिला मछली उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है लेकिन मत्स्य बीज के लिए अब भी किसानों को दूसरे राज्यों, खासकर कोलकाता पर निर्भर रहना पड़ता है। इस समस्या समाधान के लिए मत्स्य विभाग ने चांदन के बधुआ और रजौन थाना के पास स्थित दो सरकारी मत्स्य बीज प्रक्षेत्रों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर विकसित करने का फैसला लिया है।
सरकार की क्या है तैयारी?
दोनों क्षेत्र करीब पांच-पांच एकड़ में फैले हैं, लेकिन वर्षों से निष्क्रिय पड़े हैं। यहां न तो मछली पालन हो रहा है और न ही बीज उत्पादन। संसाधनों और आधुनिक सुविधाओं के अभाव को देखते हुए विभाग अब निजी कंपनियों या फार्मा प्रोड्यूसर कंपनी को इनके संचालन की जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी में है। निजी निवेश से यहां आधुनिक हैचरी, नर्सरी तालाब और अन्य जरूरी ढांचा का विकास किया जाएगा।
रोजगार के खुलेंगे अवसर
जानकारी के अनुसार इस पहल से स्थानीय मछली पालकों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज आसानी से और कम लागत में उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही परिवहन के दौरान होने वाले नुकसान में भी कमी आएगी। इसके अलावा प्रक्षेत्रों के आधुनिकीकरण से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। विभाग जल्द ही इसके लिए निविदा प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है और चयनित एजेंसी को निश्चित अवधि के लिए लीज पर यह क्षेत्र सौंपा जाएगा।
आधे दर्जन के करीब हैं हैचरी
जिला में मत्स्य विभाग की तरफ से बीज उत्पादन के लिए अनुदान दिया जा रहा है। करीब आधे दर्जन किसानों ने निजी स्तर पर हैचरी स्थापित की है लेकिन उत्पादन अभी सीमित है। जिले में रोहू, कतला, पंगेशियस समेत अन्य मछलियों का बड़े पैमाने पर पालन जारी है। जानकारी है कि विभाग अब तिलापिया पालन को भी बढ़ावा दे रहा है।
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