बिहार के सरकारी स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एंट्री! शिक्षकों को मिली स्पेशल ट्रेनिंग

बिहार के सरकारी स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एंट्री! शिक्षकों को मिली स्पेशल ट्रेनिंग

बिहार के सरकारी स्कूलों में अब सीबीएसई की तर्ज पर एआई की पढ़ाई होगी। माइक्रोसॉफ्ट के सहयोग से 10 जिलों के शिक्षकों को ट्रेनिंग मिली है। 24 अप्रैल को अन्य राज्यों के स्टडी रिपोर्ट पर बड़ा फैसला होगा।

बिहार के सरकारी स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एंट्री  शिक्षकों को मिली स्पेशल ट्रेनिंग

न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क: बिहार के सरकारी स्कूलों की सूरत अब बदलने वाली है। राज्य के बच्चे अब केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीक का भी ज्ञान लेंगे। शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों को 'हाईटेक' बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए शिक्षकों को एआई की बारीकियां सिखाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।

10 जिलों के मास्टर ट्रेनर्स तैयार

पटना में आयोजित दो दिवसीय ‘एआई एलिवेट फॉर एजुकेटर्स’ कार्यक्रम के तहत राज्य के शिक्षकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने का अभियान शुरू हुआ। पिरामल फाउंडेशन और माइक्रोसॉफ्ट के ग्लोबल पार्टनर 'डी पेडागोंगिक्स' के सहयोग से आयोजित इस सत्र में पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और सारण समेत 10 जिलों के 160 मास्टर फैसिलिटेटर्स को ट्रेनिंग दी गई। अब ये मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने जिलों में जाकर अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे, जो आगे चलकर बच्चों को एआई की बुनियादी समझ सिखाएंगे।

5 राज्यों की स्टडी: 24 अप्रैल को पेश होगी सुधार रिपोर्ट

बिहार की शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों की एक विशेष टीम ने केरल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, असम और तेलंगाना का दौरा किया है। वहां के मॉनिटरिंग सिस्टम और इनोवेशन का बारीकी से अध्ययन करने के बाद टीम पटना लौट आई है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट 24 अप्रैल को पेश की जाएगी। इस बैठक में राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) मौजूद रहेंगे, जहाँ अन्य राज्यों के सफल मॉडल्स को बिहार में लागू करने पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

डिजिटल साक्षरता की ओर बढ़ता बिहार

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के इस कदम से न केवल शिक्षकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी वैश्विक स्तर की तकनीक से रूबरू होने का मौका मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों का नजरिया बदलेगा और बच्चे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकेंगे।

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