आशिष शास्त्री/न्यूज 11 भारत
सिमडेगा/डेस्क: हर साल 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनता है. खेल की नगरी सिमडेगा के लिए आज का दिन बहुत खास है. आज खेल दिवस है जो हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है और सिमडेगा में दौड़ता है हॉकी का अंडर करंट.
आज का दिन जिस महान खिलाड़ी को समर्पित है आज पहले उनकी बात कर लिया जाए. मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर उनके खेल की तेज धार के बदौलत कहा जाता है. उन्होंने साल 1928, 1932 और 1936 में तीन ओलिंपिक स्वर्ण पदक जीते. 1928 में ग्रीष्मकालीन नीदरलैंड्स के एम्स्टर्डम में खेला गया था
अब बात करते हैं खेल की नगरी सिमडेगा की जहां हॉकी का अंडर करंट किसी हिरण की तरह उछाल मारते हुए दौड़ती है. दरअसल, यह जानना भी दिलचस्प होगा की हॉकी सिमडेगा के लिए क्यों खास है. इसके लिए कुछ आंकड़े हैं जो तथ्य को बेहतर ढंग से स्पष्ट कर सकते हैं. सिमडेगा में 60 से अधिक नेशनल और इंटरनेशनल खिलाड़ी हुए हैं. हर साल यह संख्या बढ़ता ही जाता है. इनमें तीन खिलाड़ी ओलोम्पियन भी रहे हैं. एक छोटे से गांव लट्ठाखम्हान में इस राज्य की सबसे पुरानी हॉकी चैंपियनशिप पिछले 35 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही है. इस प्रतियोगिता में ही 60 से अधिक टीमें शामिल होती है. जिसमें झारखंड सहित उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और बंगाल से भी टीमें हिस्सा लेती हैं. बोलबा प्रखंड के अवगा गांव में 50 टीमों के साथ स्थानीय प्रतियोगिता होती है. मेजर ध्यानचंद टूर्नामेंट, राधा कृष्ण मेमोरियल टूर्नामेंट, गांधी शास्त्री टूर्नामेंट, गोंडवाना विकास मंच चैंपियनशिप, जयपाल सिंह मुंडा टूर्नामेंट, बिरसा मुंडा स्कूल लेबल चैंपियनशिप, और अम्बेडकर टूर्नामेंट जैसे एक दर्जन से ज्यादा बड़े कैलेंडर टूर्नामेंट तो सिमडेगा में हरेक साल आयोजित होते हैं. इसके अलावे छोटे छोटे टूर्नामेंट जिसमें कटहल, मुर्गा और खस्सी टूर्नामेंट भी खूब खेले जाते हैं और लोकप्रिय भी हैं.
जानकर भी कहते हैं कि सिमडेगा में हॉकी का उत्साह और हुजूम दोनों मिलता है. यहां के खेत खलिहानों में हॉकी का फिजिक खिलाड़ियों में डेवलप करता है. यहां के बच्चे "शरीफा" और "बेल" के सूखे फलों से हॉकी का गेंद और बांस के जड़ को खोद कर हॉकी का स्टिक तैयार करते रहे हैं. यही जुनून उन्हें इंटरनेशनल और नेशनल खेलों तक पहुंचाती है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी सिमडेगा के माटी में दौड़ते खेल के अंडर करंट की तारीफ करते हुए यहां एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम का भी तोहफा दिया. जो अब लगभग पूर्ण अवस्था में उद्घाटन का इंतजार कर रहा है. साथ हीं यहां उच्च स्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण भी किया गया है. जहां एक उच्च स्तर का फुटबॉल ग्राउंड बनाया जा रहा है. इसके अलावे सिमडेगा की बेटी सलीमा ने भी अपने खेल के माध्यम से ओलंपिक में पीएम नरेंद्र मोदी ढेरों तारीफे बटोर यह बता दिया कि सिमडेगा में खेल सिर्फ शौक नहीं एक संस्कृति है. इन सभी खेलों के साथ सिमडेगा जिला क्रिकेट, बॉलीबॉल, शूटिंग, आर्चरी, कुश्ती सहित अन्य खेलों में भी निरंतर आगे बढ़ रहा है.
सिमडेगा के इसी खेल के जज्बे इसी खेल की संस्कृति को और सुविधा मिलते हीं खिलाडियों की धार दशर्को के तालियों की गरगराहट में तब्दील होकर पदक लाने में देर नहीं करेंगे. खिलाडी धुरंधर तैयार होंगे तो झारखंड सरकार के खेल को बढावा देने के सपने को भी बल मिलेगा और पदक आने से सिमडेगा सहित राज्य का नाम भी शीर्ष पर होगा.
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