न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 से बांग्लादेश के हटने के बाद पाकिस्तान ने भी पैतरेबाजी शुरू कर दी. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चीफ मोहसिन नकवी पाकिस्तान सरकार के कंधे पर बंदूक रखकर BCCI और ICC को डराने की कोशिश की कि बांग्लादेश के समर्थन में वह भी टूर्नामेंट का बहिष्कार करेगा. हालांकि इन अटकलों के बीच पाकिस्तान ने अपनी टीम घोषित कर दी है. लेकिन उसकी पैतरेबाजियों अभी भी जारी हैं. लेकिन सवाल है कि क्या पाकिस्तान वाकई में ऐसा कर सकता है?
बता दें कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के चीफ मोहसिन नकवी ने इस विषय को लेकर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात भी की थी. मोहसिन चाहते हैं कि पाकिस्तान टूर्नामेंट से अपना नाम वापस ले ले, लेकिन यह फैसला उन्होंने सरकार पर छोड़ दिया है. ताजा खबर यह है कि पाकिस्तान टी-20 विश्व कप में हिस्सा लेगा या नहीं, यह अगले शुक्रवार या अगले सोमवार तक ही पता चल पायेगा. बता दें कि टी-20 विश्व कप 7 फरवरी से शुरू होने वाला है. विश्व कप का आयोजक भारत है, लेकिन पाकिस्तान के सभी मैच श्रीलंका में खेले जायेंगे.
पाकिस्तान के लिए आसान नहीं होगा टूर्नामेंट से बाहर होना
पाकिस्तान भले ही बांग्लादेश के समर्थन में टूर्नामेंट से बाहर होने के लिए छटपटा रहा है. लेकिन कुछ कारण है, जो उसे आसानी से टूर्नामेंट छोड़ देने की इजाजत नहीं देते हैं-
आईसीसी के हर पूर्ण सदस्य देश किसी एक टूर्नामेंट के लिए भागीदारी समझौते (टीपीए) पर हस्ताक्षर करते हैं. अगर कोई टीम अंतिम समय में हटती है तो यह अनुबंध का सीधा उल्लंघन है. अगर पाकिस्तान टूर्नामेंट से खुद को बाहर करता है तो आईसीसी इस बाध्यकारी नियम का हवाला देते हुए पाकिस्तान के वार्षिक राजस्व हिस्से को रोक सकती है, जो करीब 34.5 मिलियन डॉलर (317 करोड़ रुपये) होगा. पाकिस्तान जैसे 'कंगाल' देश के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका होगा.
पाकिस्तान के बहिष्कार फैसले से उस पर निलंबन की तलवार भी लटक सकती है. चूंकि यह फैसला सरकार के द्वारा थोपा गया माना जायेगा इसलिए आईसीसी इसे खेल को "हथियार" बनाने का प्रयास मानते हुए पाकिस्तान पर निलंबन का हथियार चला सकती है. बता दें कि इससे पहले जिम्बाब्वे और श्रीलंका ऐसा निलंबन झेल चुके हैं.
एक बड़ा खतरा एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) पर पाकिस्तान के वर्चस्व को भी खटाई मेंडाल देगा. वर्तमान में पीसीबी के चीफ एसीसी के चीफ भी है. पाकिस्तान पर अगर निलंबन की तलवार लटकेगी तो पाकिस्तान एसीसी में अपनी जगह भी खो देगा. यह या तो मोहसिन नकवी को नहीं दिख रहा या फिर वह उन्होंने यह सोच कर कि अगर पाकिस्तान सरकार कोई फैसला लेगी तो उनकी कुर्सी बची रहेगी, उन्होंने गेंद सरकार के पाले में डाल दी है.
पाकिस्तान पर एक खतरा 2028 महिला टी20 विश्व कप के आयोजन को लेकर भी पैदा हो सकता है. 2028 में होने वाले इस टूर्नामेंट का आयोजक पाकिस्तान है. बहिष्कार से यह मौका भी उसके हाथों से निकल जायेगा.
एक खतरा पाकिस्तान के घरेलू टूर्नामेंट पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) पर भी मंडरा सकता है. पीएलएल भले ही घरेलू टूर्नामेंट है, लेकिन इसकी सफलता विदेशी क्रिकेटरों के कारण है. पाकिस्तान अगर टी-20 विश्व कप का बहिष्कार करता है तो इन विदेशी खिलाड़ियों के सामने अनापत्ति प्रमाण पत्र जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है. जब विदेशी खिलाड़ी पाकिस्तान नहीं जा पायेंगे तो स्टेडियम तक दर्शकों को भी खींच पाना पीसीबी के लिए मुश्किल होगा. यह भी पाकिस्तान के लिए एक बड़ा घाटा सिद्ध हो सकता है.
पाकिस्तान के टी20 विश्व कप से हटने के बाद क्या होगा?
इन तमाम अनिश्चितताओं और किन्तु-परन्तु के बीच यह सवाल शेष ही रह जाता है कि पाकिस्तान के टूर्नामेंट बहिष्कार के बाद क्या होगा. तो इसका जवाब यही है कि जिस प्रकार बांग्लादेश के हटने के बाद स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में जगह मिल गयी थी, उसी प्रकार पाकिस्तान के हटने केबाद युगांडा की लॉटरी लग सकती है. क्योंकि टी20 क्रिकेट में स्कॉटलैंड के बाद युंगाडा ही है. युगांडा इस समय टी-20 क्रिकेट की शीर्ष रैंकिंग में 21वें स्थान पर है. पाकिस्तान के हटने के बाद वह टॉप 20 टीमों में शामिल हो जायेगा.
यह भी पढ़ें: भारत और EU के FTA से खत्म होगी ट्रंप की टैरिफगीरी, भारतीय निर्यातकों की लौटी मुस्कान, उपभोक्ताओं की बल्ले-बल्ले