न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना - राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की छोटी बेटी रोहिणी आचार्य ने महिला आरक्षण को लेकर सोशल मीडिया पर एक लंबा और सवाल खड़ा करने वाला पोस्ट साझा किया है। उन्होंने देश में महिलाओं की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए पूछा है कि जब तक महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और वास्तविक सशक्तिकरण सुनिश्चित नहीं होता, तब तक महिला आरक्षण बिल का औचित्य क्या है।
हाइलाइट्स:
- रोहिणी आचार्य ने महिला आरक्षण पर उठाए सवाल
- महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण पर चिंता
- सामाजिक भेदभाव और पितृसत्ता को बताया बड़ी बाधा
- न्याय और समान अधिकारों की मांग तेज
जमीनी हकीकत पर उठाए सवाल
रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में कहा कि देश में बड़ी संख्या में महिलाएं आज भी बुनियादी शिक्षा से वंचित हैं। खासकर गरीब तबके की महिलाएं पढ़ाई और आत्मनिर्भरता के अवसरों से दूर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पढ़ी-लिखी महिलाओं को भी अक्सर घर तक सीमित रहने के लिए मजबूर किया जाता है।
सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर चिंता
उन्होंने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों जैसे बलात्कार, दहेज उत्पीड़न और यौन शोषण के मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता। साथ ही, आवाज उठाने वाली महिलाओं को घरेलू हिंसा और सोशल मीडिया ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है।
सामाजिक सोच और भेदभाव पर निशाना
रोहिणी ने पितृसत्तात्मक सोच को महिलाओं की प्रगति में बड़ी बाधा बताया। उन्होंने कहा कि आज भी कई जगहों पर पर्दा प्रथा, पहनावे पर रोक-टोक और मायके-ससुराल के भेदभाव जैसी समस्याएं मौजूद हैं। महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिलने के बावजूद उन्हें संपत्ति और सामाजिक सम्मान से वंचित किया जाता है।
आरक्षण से पहले बुनियादी बदलाव की मांग
अपने पोस्ट के जरिए रोहिणी आचार्य ने सवाल उठाया कि जब तक महिलाओं को सुरक्षा, शिक्षा, सम्मान और समान अवसर नहीं मिलते, तब तक केवल आरक्षण देकर क्या वास्तविक बदलाव संभव है। उन्होंने सरकार और समाज दोनों से इस दिशा में गंभीर कदम उठाने की अपील की है।
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