न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना - बिहार की राजनीति में कई ऐसे किस्सें जो काफी ही रोचकता से भरे हुऐ और दबे हुए हैं। बिहार की राजनीति का एक किस्सा ये भी है कि बिहार में कर्पूरी ठाकुर के बाद ऐसा कोई मंत्री नहीं हुआ जो डिप्टि सीएम से सीएम बना हो, पहली बार कर्पूरी ठाकुर 22 दिसंबर 1970 को डिप्टि सीएम से मुख्यमंत्री बने थे. उसके बाद बिहार की राजनीति में कोई ऐसा मंत्री नहीं हुआ जो डिप्टि सीएम से सीएस बना हो।
इस बात को लोगों ने अंधविश्वास की कड़ी से जोड़ दिया था और बातें ये निकल कर आती थीं कि बिहार का डिप्टि सीएम का पद अपशगुन है, क्योंकि कर्पूरी ठाकुर के बाद इन 56 सालों में कोई भी डिप्टि सीएम आज तक मुख्यमंत्री नहीं बना, इतना ही नहीं बात ये भी निकलने लगी कि बिहार का कोई भी डिप्टि सीएम अपने कार्यकाल को भी पूरा नहीं कर पाता था।
बिहार की राजनीति में फैली इस अवधारण को आज सम्राट चौधरी ने बदल दी है, कर्पूरी ठाकुर के 56 साल के बाद आज एक डिप्टि सीएम फिर से बिहार के मुख्यमंत्री पद पर आसीन है।
बिहार की राजनीति में 15 अप्रैल का दिन सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि एक लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक धारणा के टूटने का भी गवाह बन गया। सम्राट चौधरी अब राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, और इसके साथ ही उन्होंने 56 साल पुरानी उस ‘राजनीतिक मिथक’ को खत्म कर दिया, जिसमें माना जाता था कि डिप्टी सीएम कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाता।
डिप्टी सीएम की कुर्सी से सीएम तक—टूटी परंपरा
बिहार में आखिरी बार कर्पूरी ठाकुर ने 1970 में डिप्टी सीएम से मुख्यमंत्री बनने का सफर तय किया था। उसके बाद दशकों तक कई बड़े चेहरे उपमुख्यमंत्री बने, लेकिन कोई भी सीएम की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाया।
अब सम्राट चौधरी ने इस लंबे ‘राजनीतिक सूखे’ को खत्म कर नई मिसाल पेश कर दी है।
सुशील मोदी-तेजस्वी भी नहीं कर पाए जो सम्राट ने कर दिखाया
बिहार की राजनीति में सुशील कुमार मोदी और तेजस्वी यादव जैसे दिग्गज कई बार डिप्टी सीएम रहे, लेकिन मुख्यमंत्री बनने का मौका नहीं मिला।
ऐसे में सम्राट चौधरी का यह ‘प्रमोशन’ सिर्फ पद परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक धैर्य और मौके की पहचान का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
बीजेपी के लिए ऐतिहासिक पल
भारतीय जनता पार्टी के लिए भी यह एक ऐतिहासिक क्षण है। पहली बार बिहार में पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहा है।
एनडीए सरकार का नेतृत्व अब सीधे भाजपा के हाथ में होगा, जो राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
तीसरी बार विधायक दल के नेता, इस बार सीएम की कुर्सी
सम्राट चौधरी लगातार तीसरी बार भाजपा विधायक दल के नेता चुने गए हैं।
पहले दो कार्यकाल में वे डिप्टी सीएम बने, लेकिन इस बार समीकरण बदले और नेतृत्व सीधे उनके हाथ में आ गया। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सत्ता का संतुलन बदला और सम्राट को शीर्ष पद तक पहुंचने का मौका मिला।
नई सरकार, नया संकेत
सम्राट चौधरी के साथ जेडीयू के विजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी डिप्टी सीएम के रूप में शपथ लेंगे।
हालांकि कैबिनेट विस्तार बाद में होगा, लेकिन साफ है कि यह सरकार गठबंधन संतुलन के साथ-साथ नए राजनीतिक संदेश भी दे रही है।