रोहन निषाद/न्यूज़11 भारत
चाईबासा/डेस्क: बंगाल की खाड़ी में पनपे डीप डिप्रेशन का व्यापक प्रभाव अब पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है. झारखंड और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्र सारंडा में बीते 36 घंटों से रुक-रूककर मूसलाधार बारिश हो रही है. ठंडी हवाओं के थपेड़ों और घने कुहरे के कारण आम जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है.
मौसम के इस रूखे मिजाज की वजह से चाईबासा, चक्रधरपुर, मनोहरपुर, जगन्नाथपुर, किरीबुरू और मेघाहातुबुरू समेत समूचे पर्वतीय अंचल में गतिविधियां ठहर सी गई हैं. व्यावसायिक स्थलों और स्थानीय बाजारों में वीरानी छाई हुई है, जिससे कारोबारियों का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इस बारिश और अचानक बढ़ी ठिठुरन से सबसे अधिक कठिनाई स्कूली छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है. बच्चे जलभराव के बीच बरसाती और छाते के सहारे विद्यालय पहुंचने को विवश हैं. कई रिहाइशी क्षेत्रों में जलजमाव होने से स्थानीय निवासियों की फजीहत बढ़ गई है.
दूसरी ओर, लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से क्षेत्र के नदी-नाले उफान पर है. गुवा-बड़ाजामदा मार्ग पर स्थित बोकना गांव के पास पंचमुखी हनुमान मंदिर के निकट कारो नदी का लोहे का पुल जलमग्न हो चुका है. पुल के ऊपर से तेज धार में बहते पानी के कारण यातायात अत्यंत जोखिमभरा हो गया है.
गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए गुवा प्रशासन ने एहतियातन रेड अलर्ट जारी किया है. प्रशासनिक अधिकारियों ने आम नागरिकों से गुहार लगाई है कि जलमग्न पुलिया से होकर गुजरने का दुस्साहस न करें, क्योंकि बढ़ता जलस्तर किसी भी वक्त बड़ी अनहोनी को न्योता दे सकता है. इसके साथ ही ग्रामीणों को बिना वजह घरों से बाहर न निकलने, जल स्रोतों से दूरी बनाए रखने तथा उफनती नदियों में मछली पकड़ने से सख्त परहेज करने की हिदायत दी गई है.
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