पंकज कुमार/न्यूज11 भारत
घाघरा/डेस्क: .घाघरा न्यूज 11 भारत का खबर का असर दिखने लगा है. कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच घाघरा प्रखंड के कुछ निजी स्कूलों ने आखिरकार बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल के समय में बदलाव किया है. हालांकि, क्षेत्र के कई निजी स्कूल आज भी पुराने समय पर ही अड़े हुए हैं. परिणामस्वरूप, छोटे-छोटे बच्चों को सुबह की कड़ाके की ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल जाना पड़ रहा है. अभिभावकों का कहना है कि जब सरकारी स्कूलों में समय परिवर्तन कर बच्चों को राहत दी जा सकती है, तो निजी स्कूलों को भी उसी लाइन पर लाने के लिए प्रशासन को आगे आना होगा*
सीधे-सीधे बच्चों के सेहत से खेलवाड़ है नीरज जयसवाल
अभिभावक नीरज जयसवाल ने कहा कि सुबह के समय ठंड चरम पर रहती है और कोहरा भी घना रहता है. उन्होंने कहा,
"सरकारी स्कूलों का समय बदल दिया गया, लेकिन अधिकांश निजी स्कूल अब भी बच्चों को सुबह-सुबह ही बुला रहे हैं. ये सीधे-सीधे बच्चों की सेहत से खिलवाड़ है. प्रशासन को ऐसे स्कूलों पर सख्ती करनी चाहिए."
बच्चों की जान से बड़ा कोई नियम नहीं होता- रूपेश साहु
अभिभावक रूपेश साहु ने निजी स्कूल प्रबंधन के रवैये पर नाराज़गी जताते हुए कहा फीस के नाम पर मोटी रकम वसूलने वाले निजी स्कूलों को कम से कम इतनी जिम्मेदारी तो लेनी ही चाहिए कि ठंड में बच्चों की जान से बड़ा कोई नियम नहीं होता. हमने समय बदलने की मांग उठाई, लेकिन ज्यादातर जगह सिर्फ आश्वासन मिला, ठोस फैसला नहीं.
सुबह कांपते हुए बच्चे स्कूल जाने के लिए तैयार होते है रोहित दुबे
अभिभावक रोहित दुबे ने कहा कि वह रोज़ाना कांपते हुए अपने बच्चों को स्कूल जाते देख मजबूर महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा,
"सुबह बच्चे ठंड से कांपते हुए तैयार होते हैं. न बस का समय बदला, न स्कूल का. कई बच्चे सर्दी-जुकाम और बुखार की चपेट में आने लगे हैं. अगर समय में जल्द बदलाव नहीं हुआ तो हमें बच्चों को कुछ दिन के लिए स्कूल से रोकने पर विचार करना पड़ेगा."
अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ठंड के मौसम में समय परिवर्तन केवल सरकारी स्कूलों में ही नहीं, बल्कि सभी निजी स्कूलों में अनिवार्य किया जाए. उनका कहना है कि कुछ निजी स्कूलों द्वारा समय में बदलाव स्वागतयोग्य पहल है, लेकिन जब तक क्षेत्र के सभी निजी स्कूल बच्चों के हित में एक समान निर्णय नहीं लेते, तब तक बच्चों की ठिठुरन पूरी तरह खत्म नहीं होगी.
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