पंकज कुमार/न्यूज11 भारत
घाघरा/डेस्क: घाघरा थाना क्षेत्र में अपराध अपने चरम पर है.अपराधी जिस तरीके से बेखौफ होकर लगातार अपराध कर रहे है. इससे व्यवसाई वर्ग डर और सदमे में है. उन्हें लगातार अपना और अपने व्यवसाय के सुरक्षा की चिन्ता सताने लगी है. इधर अपराधी लगातार घटना पर घटना कर पुलिस को खुली चुनौती दे रहे है. स्थानीय पुलिस इनके सामने बेवश और लाचार नजर आ रही है.
इससे पूर्व में मां जगदंबा ज्वेलर्स में 2024 में हुई थी चोरी की वारदात
घाघरा मेन रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया घाघरा शाखा के बगल में स्थित मां जगदम्बा ज्वेलर्स में 29 दिसंबर 2024 को हुई चोरी की घटना को अब तक पुलिस सुलझा भी नहीं पाई और इधर सोमवार की शाम सात बजे हरि ओम गहना घर के संचालक शशांक सोनी जब अपनी दुकान बन्द कर अपने मां के साथ स्कूटी से घर जा रहे थे. हथियार के बल पर करीब सात की संख्या मे पहले से घात लगाए अपराधियों ने सतर हजार रुपए नकद सहित करीबन एक करोड़ रुपए के ज़ेवरात लूटकर बड़ी ही आराम से फरार हो गए. उन्होंने दहशत फैलाने के उद्देश्य से फायरिंग भी की.सबसे आश्चर्यजनक बात है कि थाना और घटना स्थल की दूरी महज 200 मीटर होगी और यह इलाका भीड़ भाड़ वाला है. इससे साफ पता चलता है
घाघरा थाना क्षेत्र में अपराधियों के मन में पुलिस और कानून का डर बिल्कुल ही नहीं
यह पुलिस के लिए लिए खुली चुनौती है. घटना की सूचना पाकर एसडीपीओ सुरेश यादव और इंस्पेक्टर विनय कुमार शाम मे ही घटना स्थल पहुंचे. पुलिस लगातार सीसीटीवी खंगाल रही है और हर तकनीकी पहलुओं की जांच कर धर पकड़ के लिए लगातार छापेमारी कर रही है, लेकिन 17 घंटे बीत जाने के बावजूद भी अपराधियों का अब तक पता नहीं चल पाया है. बता दे कि पुटो रोड हमेशा से ही संवेदनशील रहा है. यहां अपराधियों का आना जाना और जमावड़ा रहता है.जिसकी शिकायत हमेशा पुलिस को दी जाती रही है, लेकिन पुलिस के द्वारा कभी भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया. अगर पुलिस सचेत रहती तो शायद कल की घटना को टाला जा सकता था.
पुलिस पेट्रोलिंग पर उठे बड़े सवाल
इस बड़ी वारदात के बाद स्थानीय व्यवसायियों में भारी नाराजगी है . लोगों का कहना है कि अगर नियमित रूप से पुलिस पेट्रोलिंग करती तो इतनी बड़ी घटना संभव नहीं थी . अगर पुलिस लगातार सड़क पर दिखती, तो अपराधियों के हौसले इतने बुलंद नहीं होते .
शांति समिति की बैठकों में दावे, सड़कों पर अपराधियों का राज
घाघरा की यह घटना सिर्फ एक डकैती नहीं, बल्कि प्रशासनिक दावों की पोल खोलने वाली बड़ी चेतावनी है व्यापारियों ने कहा कि शांति समिति की बैठकों में हर बार सुरक्षा और पेट्रोलिंग बढ़ाने की बातें होती है, लेकिन हकीकत में इसका कोई असर नजर नहीं आता. जब थाने के आसपास ही लोग सुरक्षित नहीं, तो बाकी इलाके की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजिमी है.
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