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पलामू/डेस्क: पलामू जिले के पांडू प्रखंड के सुदूरवर्ती गांव मुसीखाप से आने वाले लेखक एवं गीतकार हर्षू शर्मा लोक भाषाओं और लोकसंगीत के क्षेत्र में अपनी रचनात्मक पहचान बना रहे हैं. वे भोजपुरी, मगही, झारखंडी और पूर्व-छपरहिया लोकगीतों के साथ-साथ निर्गुण एवं भजन लेखन में भी सक्रिय हैं.
ग्रामीण परिवेश से जुड़े हर्षू शर्मा ने लोकभाषा और लोक संस्कृति को अपनी लेखनी का आधार बनाया है. उनकी रचनाओं में ग्रामीण जीवन, लोकपरंपरा, सामाजिक भावनाओं, भक्ति और आध्यात्मिक चिंतन की झलक मिलती है. अलग-अलग लोकभाषाओं में लेखन के माध्यम से वे क्षेत्रीय संस्कृति और लोकभावनाओं को शब्द देने का प्रयास कर रहे हैं.
कई कलाकारों को दे चुके हैं अपने गीत
हर्षू शर्मा ने विभिन्न कलाकारों के लिए गीत लिखे हैं. कलाकारों ने उनकी रचनाओं को अपनी-अपनी गायन शैली, भाषा और संगीत के अनुरूप प्रस्तुत किया है. इससे उनके लिखे गीतों को अलग-अलग स्वरूपों में श्रोताओं तक पहुंचने का अवसर मिला है. उनकी रचनात्मकता की खासियत यह है कि वे लोकभाषाओं की सहजता और स्थानीय भावनाओं को बनाए रखते हुए गीतों को आकार देने का प्रयास करते हैं.