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पलामू/डेस्क: पलामू जिले में पुलिस की तत्परता से मॉब लिंचिंग की एक खौफनाक वारदात होते-होते बची. यहाँ बच्चा चोरी के शक में उग्र हुई भीड़ ने बाल संरक्षण गृह (चाइल्ड केयर होम) की टीम पर ही हमला बोल दिया. गनीमत रही कि वक्त रहते पुलिस मौके पर पहुँच गई और टीम के सदस्यों को भीड़ के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया.
इस पूरे विवाद की शुरुआत शनिवार को हुई, जब नावाबाजार थाना क्षेत्र में बाल श्रम के खिलाफ एक विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था. इस अभियान के तहत तीन बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराकर पलामू बाल गृह में सुरक्षित रखवाया गया. लेकिन शनिवार दोपहर को ही ये तीनों बच्चे मौका पाकर बाल गृह से चुपचाप फरार हो गए.
लापता बच्चों की तलाश में बाल गृह के कर्मचारी खुद ही नावाबाजार इलाके की तरफ निकल पड़े. कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने बच्चों को ढूंढ निकाला और जब वे उन्हें गाड़ी में बैठाकर मेदिनीनगर वापस लौट रहे थे, तभी टाउन थाना क्षेत्र के बीसफूटा के पास स्थानीय लोगों को उन पर शक हो गया. लोगों ने उन्हें 'बच्चा चोर' समझ लिया और देखते ही देखते वहाँ भारी भीड़ जमा हो गई. उग्र ग्रामीणों ने पूरी टीम को घेरकर उनके साथ मारपीट शुरू कर दी.
घटना की भनक लगते ही टाउन थाना के टीओपी 3 प्रभारी समय राम पुलिस बल के साथ तुरंत घटना स्थल पर पहुँचे और सूझबूझ दिखाते हुए बाल गृह की टीम को उग्र भीड़ से रेस्क्यू किया.
इस मामले में बाल गृह प्रबंधन की एक बड़ी लापरवाही भी सामने आई है. नियमों के मुताबिक बच्चों के भागने की तुरंत सूचना वरिष्ठ अधिकारियों, सीडब्ल्यूसी (बाल कल्याण समिति) या स्थानीय पुलिस को दी जानी चाहिए थी, लेकिन प्रबंधन ने यह जानकारी किसी से साझा नहीं की. बवाल होने के बाद ही अन्य विभागों को इस फरारी का पता चला.
मामले की गंभीरता को देखते हुए सामाजिक सुरक्षा विभाग के सहायक निदेशक पीयूष कुमार ने जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी को इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. वहीं टाउन थाना प्रभारी ज्योतिलाल रजवार और सीडब्ल्यूसी के सदस्य रवि शंकर ने भी पुष्टि की है कि उन्हें बच्चों के लापता होने के बारे में पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी. पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है.