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गढ़वा/डेस्क: आज धूमधाम से संपन्न हुए प्रकृति पर्व सरहुल में राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने परंपरागत तरीके से शोभा यात्रा में भाग लिया. वह मांदर बजाते हुए तथा मांदर की ताल पर परंपरागत नृत्य करते और थिरकते हुए जुलूस में शामिल हुईं.
अपने पैतृक गांव पंडरा के बनहोरा से प्रारंभ इस शोभायात्रा में शामिल होने के बाद मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि सरहुल न केवल आदिवासियों का परंपरागत त्यौहार है बल्कि यह उन्हें प्रकृति, संस्कृति और अपनी सभ्यता से भी जोड़ता है जो कि आदिवासियों की न केवल धरोहर है बल्कि वही उनके अस्तित्व का कारण भी है. शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि सरहुल प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर जीवन बिताने का संदेश देनेवाला एक ऐसा अद्भुत त्यौहार है जिसका पर्याय आदिवासियों के अतिरिक्त और कहीं भी नहीं है लेकिन इसका संदेश संपूर्णता के साथ मानवता के लिये एवं संपूर्ण दुनिया के लिये है.
इससे पहले शिल्पी नेहा तिर्की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक तथा मुख्यमंत्री की पत्नी कल्पना सोरेन के साथ आदिवासी छात्रावास में हुए सरहुल महोत्सव में भी शामिल हुईं
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