संजय कुमार साहू/ न्यूज़ 11भारत
रांची/डेस्क: बुढ़मू प्रखंड के मक्का गांव की बेटी ज्योति कुमारी ने विपत्तियों के पहाड़ तोड़ते हुए एक नया इतिहास रच दिया है. स्वर्गीय योगेंद्र प्रसाद साहू की पुत्री ज्योति का चयन झारखंड स्टेट लोक सेवा आयोग द्वारा सीडीपीओ (Child Development Project Officer) के पद पर हो गया है. यह सफलता सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि हौसले, मां की ममता और अथाह संघर्ष की अमर गाथा है!साल 2000 का वो काला दिन... ज्योति मात्र 7 साल की नन्ही बच्ची थीं, जब उग्रवादियों ने उनके पिता योगेंद्र प्रसाद साहू की निर्मम हत्या कर दी. साधारण किसान परिवार की जिंदगी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. लेकिन ज्योति की मां जयश्री देवी ने हार नहीं मानी. खेती-किसानी की मेहनत से बेटी की पढ़ाई जारी रखी. 2005 में जयश्री देवी खुद सहिया के पद पर चयनित हुईं, जिससे ज्योति के सपनों को नई उड़ान मिली.2024: PT पास, लेकिन मां की बीमारी ने रोकी राह!
जब ज्योति ने CDPO की पीटी परीक्षा निकाल ली, तभी भाग्य ने फिर परीक्षा ली. मां जयश्री गंभीर बीमारी से जूझने लगीं. बेटी ने मां को कंधे पर उठाया और मुंबई ले गईं. वहां इलाज के बीच-बीच में मेंस परीक्षा की तैयारी की. रात-दिन की जद्दोजहद रंग लाई—ज्योति सफल!"सबका आशीर्वाद, मां की ताकत से जीता मुकाम!"
अपनी पहली प्रतिक्रिया में ज्योति बोलीं, "यह सफलता मेरी मां जयश्री देवी को समर्पित है. उनके बलिदान और पूरे परिवार-समाज के आशीर्वाद से मैं यहां पहुंची. बुढ़मू के हर बच्चे से कहूंगी—संघर्ष करो, जीत तुम्हारी होगी!"ज्योति की यह उपलब्धि स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा है. बुढ़मू ब्लॉक अब गर्व से चमक रहा है.
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