अमरनाथ पाठक/न्यूज11 भारत
देवघर/डेस्क: झारखंड में विगत तीन वर्षों से नगर निकाय चुनाव संपन्न न होने के कारण राज्य की शहरी विकास योजनाएँ ठप पड़ी हैं. इसके प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभावों से राज्य को अब तक लगभग 25 हजार करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है. यह खुलासा संथाल परगना चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज़ ने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर किया.
चैम्बर के अनुसार, नगर निकाय चुनाव न होने से 7,000 करोड़ रुपए से अधिक की योजनागत राशि अटकी पड़ी है, जिसमें राज्य और केंद्र की योजनाओं के साथ-साथ वित्त आयोग अनुदान, विश्व बैंक, ए डी बी सहायता, एन जी ओ मद और सीएसआर योगदान शामिल हैं. यही नहीं, व्यापारिक गतिविधियों और बाजार के रोटेशन में ठहराव के चलते लगभग 18,000 करोड़ रुपए से अधिक का अप्रत्यक्ष नुकसान भी राज्य की अर्थव्यवस्था को सहना पड़ा है. आँकड़ों के मुताबिक, हर व्यापारी को सालाना औसतन 3.5 से 4 लाख रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है.
चैम्बर अध्यक्ष गोपाल कृष्ण शर्मा ने कहा कि नगर निकाय चुनाव में हो रही अनावश्यक विलंबता झारखंड के आर्थिक और सामाजिक विकास की गति को अवरुद्ध कर रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र कदम नहीं उठाया तो व्यापारियों का विश्वास डगमगाना और रोज़गार सृजन रुकना तय है.
वहीं, महासचिव निरंजन कुमार सिंह ने कहा कि संथाल परगना चैम्बर व्यापार जगत की समस्याओं और आकांक्षाओं को निरंतर उठाता रहेगा. उन्होंने सरकार से अविलंब नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने और अवरुद्ध फंड की बहाली की मांग की. साथ ही व्यापारियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए विशेष राहत पैकेज की भी आवश्यकता बताई.
चैम्बर ने साफ कहा है कि नगर निकाय चुनावों में हो रही देरी से न सिर्फ़ राज्य की अर्थव्यवस्था चरमराई है, बल्कि निवेश और औद्योगिक प्रगति भी थम गई है. अब वक्त आ गया है कि सरकार इस मसले पर गंभीरता दिखाए और ठप पड़ी विकास योजनाओं को रफ़्तार दे.
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