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रांची/डेस्क: झारखंड में न्यायिक ढांचे से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना में हो रही देरी पर झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. मुख्य न्यायाधीश एसएम सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने बुंडू में सिविल कोर्ट निर्माण में हो रही सुस्ती को लालफीताशाही करार दिया.
यह मामला रामचरण महतो की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान उठा. अदालत को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता रिंकू भगत ने बताया कि कोर्ट के पूर्व निर्देशों के बावजूद अब तक जमीन की उपलब्धता तक सुनिश्चित नहीं हो सकी है और पूरा मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है. खंडपीठ ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले भी इस मामले में कई निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया.
सरकार ने रखा पक्ष, कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता आशुतोष आनंद ने बताया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इस विषय पर बैठक बुलाई गई थी. साथ ही रजिस्ट्रार जनरल द्वारा न्यायायुक्त को निर्माण से जुड़े सुझाव भेजे गए, लेकिन अब तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है. इस पर अदालत ने असंतोष व्यक्त किया.
9 अप्रैल को सभी अधिकारी होंगे पेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडपीठ ने 9 अप्रैल को दोपहर 2:30 बजे कॉन्फ्रेंस रूम में न्यायिक कार्यवाही के दौरान संबंधित सभी अधिकारियों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. इस बैठक में मुख्य सचिव, विधि सचिव, भवन निर्माण सचिव, न्यायायुक्त रांची, रजिस्ट्रार जनरल और उपायुक्त रांची को शामिल होने के लिए कहा गया है. अदालत अब इस मामले में ठोस प्रगति सुनिश्चित करने के मूड में नजर आ रही है.
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