विशुनगढ़ की 13 वर्षीय बच्ची की मौत मामले में HC ने स्वत: संज्ञान डिस्पोज, जांच ए...

13 वर्षीय बच्ची की मौत

विशुनगढ़ की 13 वर्षीय बच्ची की मौत मामले में HC ने स्वत: संज्ञान डिस्पोज, जांच एजेंसी को FSL रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग जिले के विशुनगढ़ में 13 वर्षीय बच्ची की संदिग्ध मौत के मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका का निष्पादन कर दिया है.

विशुनगढ़ की 13 वर्षीय बच्ची की मौत मामले में hc ने स्वत संज्ञान डिस्पोज जांच एजेंसी को fsl रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क:
झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग जिले के विशुनगढ़ में 13 वर्षीय बच्ची की संदिग्ध मौत के मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका का निष्पादन कर दिया है. अदालत ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और अब उसे महाधिवक्ता (Advocate General) के माध्यम से जांच अधिकारी (IO) को सौंपा जाएगा, ताकि पुलिस जांच को आगे बढ़ा सके.

इस मामले में हाईकोर्ट ने पहले समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया था. अदालत ने अधिवक्ता हेमंत कुमार शिकारवार को एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) नियुक्त किया था. हेमंत कुमार शिकारवार ने बताया कि मामला विशुनगढ़ की 13 वर्षीय बच्ची की मौत से जुड़ा है. घटना लगभग दो-तीन महीने पहले, रामनवमी से पूर्व निकले मंगला जुलूस के समय की है. बच्ची का शव मिलने के बाद उसके प्राइवेट पार्ट में क्रूरता की जाने की बात सामने आई थी. इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था.

उन्होंने बताया कि घटना के बाद प्रथम दृष्टया मामला हत्या और दुष्कर्म से जुड़ा प्रतीत हो रहा था. शिकारवार ने कहा कि अदालत के समक्ष उन्होंने यह प्रश्न भी उठाया था कि घटना के इतने दिनों बाद भी फॉरेंसिक रिपोर्ट समय पर क्यों नहीं भेजी गई और इसमें देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.

उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पुलिस ने भीमराम नामक व्यक्ति की कथित संलिप्तता और नरबलि की एक थ्योरी सामने रखी थी. हालांकि उन्होंने अदालत के समक्ष इस थ्योरी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह कहानी तार्किक नहीं लगती. उनका कहना था कि कथित नरबलि की कहानी और घटना की परिस्थितियों में कई विरोधाभास हैं, इसलिए जांच सभी पहलुओं से निष्पक्ष ढंग से होनी चाहिए.

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि FSL रिपोर्ट और केस डायरी का अवलोकन किया जा चुका है. चूंकि पुलिस जांच जारी है, इसलिए जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने दिया जाए. अदालत ने पहले सीलबंद लिफाफे में रखी गई FSL रिपोर्ट को अब जांच अधिकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया और कहा कि स्वत: संज्ञान याचिका का उद्देश्य पूरा हो चुका है. इसलिए इसे लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है और याचिका का निष्पादन किया जाता है.

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