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रांची/डेस्क: रांची में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के स्थायी बेंच के निर्माण को लेकर आज सोमवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के आरोपों और संबंधित अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास सामने आया.
कोर्ट को पहले बताया गया था कि भवन निर्माण की योजना (प्लान) स्वीकृति के लिए भेजी गई है. इसके बाद तकनीकी समस्याओं का हवाला दिया गया, जबकि अब कहा जा रहा है कि निर्माण के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं है. इन दलीलों पर नाराजगी जताते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि "अगर बिल्डिंग बनानी ही नहीं है, तो जमीन वापस कर दें."
गौरतलब है कि वर्ष 2015 में हाई कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने CAT के स्थायी बेंच के लिए दो एकड़ जमीन आवंटित की थी. हालांकि, 11 साल बाद भी भवन निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका है और न ही इस दिशा में कोई ठोस प्रगति हुई है.
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में दाखिल अपने हलफनामे (एफिडेविट) में कहा था कि निर्माण प्रक्रिया जारी है, लेकिन फंड की कमी और ड्रॉइंग से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका.
वहीं, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने कोर्ट में कहा कि उनके पास भवन निर्माण से संबंधित कोई प्रस्ताव ही नहीं आया है. ऐसे में कार्मिक मंत्रालय और विधि एवं न्याय मंत्रालय के जवाबों में स्पष्ट विरोधाभास सामने आया है.
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