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रांची/डेस्क: राज्यपाल-सह-झारखण्ड राज्य के विस्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि झारखण्ड के किसी क्षेत्र का नाम साइबर अपराध के लिए नहीं, बल्कि साइबर अपराध की रोकथाम और उससे प्रभावी ढंग से निपटने में अग्रणी कार्य करने वाले राज्य के रूप में लिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति में झारखण्ड के युवाओं, विशेषकर सुरक्षा शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज एवं राष्ट्र की सुरक्षा के लिए करें. राज्यपाल आज आर्यभट्ट सभागार, रांची में झारखण्ड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय, रांची के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों एवं गुरुजनों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह शैक्षणिक यात्रा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के साथ नई जिम्मेदारियों की शुरुआत भी है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थी यहाँ अर्जित ज्ञान एवं कौशल का उपयोग समाज और राष्ट्र की सेवा में करेंगे.

राज्यपाल ने कहा कि साइबर अपराध, डिजिटल धोखाधड़ी, डेटा सुरक्षा, AI के दुरुपयोग, वित्तीय एवं संगठित अपराध जैसी चुनौतियाँ सुरक्षा व्यवस्था के सामने नए प्रश्न खड़े कर रही हैं. फर्जी वीडियो, आवाज की नकल, भ्रामक सूचनाएँ और साइबर हमले गंभीर खतरे बन सकते हैं. ऐसे में सुरक्षा क्षेत्र में कार्य करने वाले युवाओं के लिए तकनीकी दक्षता के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण, विश्लेषण क्षमता और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति आवश्यक है. उन्होंने कहा कि झारखण्ड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय को राज्य की वास्तविक सुरक्षा चुनौतियों से जुड़े विषयों पर समाधानपरक शोध को बढ़ावा देना चाहिए. साइबर अपराध, अपराध मनोविज्ञान, महिला एवं बाल सुरक्षा, वित्तीय अपराध, नशीले पदार्थों की रोकथाम, आपदा प्रबंधन और आधुनिक पुलिसिंग जैसे क्षेत्रों में विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है. इसके लिए पुलिस, प्रशासन, रक्षा एवं तकनीकी संस्थानों तथा उद्योग जगत के साथ अकादमिक एवं प्रशिक्षण संबंधों को और मजबूत करने की आवश्यकता है.
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय को विद्यार्थियों के लिए फील्ड ट्रेनिंग, इंटर्नशिप, केस स्टडी और व्यावहारिक शोध के अधिक अवसर उपलब्ध कराने चाहिए, ताकि वे अपने ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ सकें. उन्होंने कहा कि सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीक का उपयोग कानून, मानव गरिमा, नागरिक अधिकारों और गोपनीयता के सम्मान के साथ होना चाहिए. उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि तकनीक को अपनी शक्ति और विवेक को अपना मार्गदर्शक बनाएँ.
राज्यपाल ने कहा कि झारखण्ड के युवाओं में सैन्य, पुलिस तथा अन्य सुरक्षा सेवाओं के प्रति उत्साह और देशसेवा की भावना रही है. विश्वविद्यालय को इस ऊर्जा और प्रतिभा को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं आधुनिक कौशल से जोड़ते हुए दक्ष, विशेषज्ञ और जिम्मेदार मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में निरंतर कार्य करना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है. इस यात्रा में आर्थिक एवं तकनीकी प्रगति के साथ सुरक्षित, सक्षम और विश्वास पर आधारित समाज भी आवश्यक है. सुरक्षा क्षेत्र में प्रशिक्षित युवा देश के विकास के लिए आवश्यक स्थिरता, विश्वास और सुरक्षित वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं. राज्यपाल ने विद्यार्थियों से सफलता मिलने पर विनम्र रहने, चुनौतियों के समय अपने मूल्यों से समझौता न करने तथा निरंतर सीखते रहने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि अपने ज्ञान को शक्ति, कौशल को राष्ट्र की सुरक्षा का साधन और आचरण को अपनी पहचान बनाएँ.