पंकज कुमार/न्यूज11 भारत
घाघरा/डेस्क: घाघरा क्षेत्र में हिंडालको कंपनी के खिलाफ खनन प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन सोमवार को आठवें दिन भी जारी रहा. आंदोलन स्थल पर ग्रामीणों से वार्ता करने के लिए सेरेंगदाग माइंस के प्रबंधक, घाघरा अंचलाधिकारी सह प्रभारी बीडीओ खाखा सुशील कुमार तथा पुलिस बल पहुंचे. घंटों चली बातचीत के बावजूद ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी. वार्ता पूरी तरह बेनतीजा रही और ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे.
मोरम का प्रस्ताव सीधे खारिज
वार्ता के दौरान माइंस प्रबंधक की ओर से सड़क को आवागमन योग्य बनाने के लिए मोरम डालकर दुरुस्त कराने का प्रस्ताव रखा गया. ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से ठुकरा दिया. ग्रामीणों का कहना था कि वर्षों से सड़क पर मोरम डालकर केवल खानापूर्ति की जाती रही है. बारिश आते ही मोरम बह जाता है और सड़क पर दोबारा बड़े-बड़े गड्ढे बन जाते हैं.
अब आश्वासन नहीं, धरातल पर पक्की सड़क चाहिए
ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि उन्हें अस्थायी मरम्मत नहीं, बल्कि स्थायी और मजबूत पक्की सड़क चाहिए. ग्रामीणों के अनुसार, खनन गतिविधियों और बॉक्साइट वाहनों के आवागमन के बावजूद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है. उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा.
दो दिन का अल्टीमेटम, फिर होगा पूर्ण चक्का जाम
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सूरज कुमार नायक ने कहा कि कंपनी प्रबंधन और प्रशासन को सड़क निर्माण का काम शुरू कराने के लिए दो दिन का अंतिम समय दिया गया है. उन्होंने कहा कि निर्धारित समय में वास्तविक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि इसके बाद बॉक्साइट ढुलाई के साथ अन्य वाहनों का भी पूर्ण चक्का जाम किया जाएगा. आंदोलनकारियों ने कहा कि अगला कदम पहले की तुलना में अधिक व्यापक होगा. डीसी कार्यालय के आश्वासन के छह दिन बाद भी काम शुरू नहीं.
कागज पर आश्वासन, जमीन पर शून्य काम
ग्रामीणों ने कहा कि गुमला डीसी कार्यालय में हुई बैठक के दौरान हिंडालको के जनरल मैनेजर की ओर से आठ दिनों के भीतर सड़क निर्माण का काम शुरू कराने का आश्वासन दिया गया था. ग्रामीणों के अनुसार, उस आश्वासन को छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक सड़क निर्माण का काम धरातल पर शुरू नहीं हुआ है.
आंदोलन स्थल पर बढ़ता जा रहा आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद काम शुरू नहीं होने से उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है. आठवें दिन भी ग्रामीण धरना स्थल पर डटे रहे. वार्ता विफल होने के बाद आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक पक्की सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा.
ग्रामीणों की मांग पर अब अगली नजर
दो दिन की दी गई समय सीमा के बाद प्रशासन और कंपनी प्रबंधन क्या कदम उठाते हैं, इस पर अब ग्रामीणों की नजर है. वहीं, ग्रामीणों की ओर से पूर्ण चक्का जाम की चेतावनी के बाद बॉक्साइट ढुलाई और क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है.
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