मुमताज अहमद/न्यूज11 भारत
खलारी/डेस्क: खलारी प्रखंड में पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश ने विकास के दावों की पूरी तरह पोल खोल दी है. जी-टाइप क्षेत्र समेत कई इलाकों में जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है. सड़कें तालाब में तब्दील हो चुकी हैं, नालियां उफान पर हैं और बारिश का पानी लोगों के घरों तक पहुंच गया है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की चुप्पी ग्रामीणों के आक्रोश का कारण बन रही है.
ग्रामीणों का आरोप है कि हर वर्ष बरसात के दौरान यही हालात बनते हैं, लेकिन न तो प्रशासन कोई स्थायी समाधान करता है और न ही पंचायत प्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं. चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले जनप्रतिनिधि अब क्षेत्र से गायब हैं, जबकि संबंधित अधिकारी भी समस्या के समाधान के बजाय मूकदर्शक बने हुए हैं.
लगातार बारिश से कई कच्ची और जर्जर सड़कें पूरी तरह कीचड़ में बदल गई हैं. जगह-जगह बने गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क और गड्ढे में अंतर करना मुश्किल हो गया है. दोपहिया वाहन चालक जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं, वहीं स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मजदूरों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
क्षेत्र में नालियों की समय पर सफाई नहीं होने और जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं रहने के कारण बारिश का पानी सड़कों से होते हुए घरों तक पहुंच रहा है. गंदगी और जलजमाव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है.
बारिश का असर स्थानीय बाजार और छोटे कारोबारियों पर भी पड़ा है. जलजमाव और खराब रास्तों के कारण बाजारों में ग्राहकों की संख्या घट गई है, जिससे छोटे व्यापारियों की आय प्रभावित हो रही है.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते नालियों की सफाई, जलनिकासी की व्यवस्था और सड़कों की मरम्मत कर दी जाती तो आज यह स्थिति नहीं बनती. उनका आरोप है कि प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों की लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है.
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जलजमाव वाले क्षेत्रों का तत्काल निरीक्षण कर पानी निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जर्जर सड़कों की मरम्मत कराई जाए, कच्ची सड़कों पर मिट्टी-मोरम डाली जाए तथा लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए.
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे. उनका कहना है कि विकास केवल कागजों और बैठकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका लाभ जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए.
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