ब्योमकेश मिश्रा/न्यूज़11 भारत
चंदनकियारी/डेस्क: भोजुडीह पश्चिमी पंचायत अंतर्गत गोंडलीभिठा, गोरिग्राम, आमडाहुटु समेत आसपास के कई गांवों में खुले में छोड़े जा रहे मवेशियों से फसलों को हो रहे नुकसान से परेशान किसानों एवं ग्रामीणों ने मंगलवार को आक्रोश एवं चेतावनी रैली निकाली. मुखिया बबलू महतो के नेतृत्व में निकली रैली में बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष एवं किसान शामिल हुए.
रैली में शामिल ग्रामीणों के हाथों में विभिन्न मांगों से संबंधित तख्तियां थीं. इनमें "गाय-बैल को खुला छोड़ना बंद करो", "मवेशियों के मालिक अपने पशुओं को खुला छोड़ना बंद करें" तथा "किसानों द्वारा उगाई जा रही धान की फसल को मवेशियों से बर्बाद करना बंद करो" जैसे नारे लिखे हुए थे. ग्रामीणों ने पूरे रास्ते जोर-जोर से नारे लगाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की.
रैली गोंडलीभिठा गांव से शुरू होकर मानपुर, ठाकुरडीह, सीतानाला, गोरिग्राम होते हुए भोजुडीह पहुंची. इस दौरान किसानों ने कहा कि उन्होंने काफी मेहनत और खर्च कर धान की फसल तैयार की है. वर्तमान समय में धान में फूल आने का समय है और ऐसे में आसपास के गांवों के कई पशु मालिक अपने गाय-बैलों एवं अन्य मवेशियों को घर में बांधकर रखने के बजाय खुले में छोड़ दे रहे हैं. खुले में घूमने वाले मवेशी खेतों में घुसकर धान की फसल को खाकर और रौंदकर बर्बाद कर रहे हैं.
किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने के इस महत्वपूर्ण समय में मवेशियों द्वारा फसल बर्बाद किए जाने से उनकी मेहनत और लागत दोनों पर पानी फिर रहा है. किसानों ने बताया कि इस समस्या को लेकर प्रशासन सहित संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत भी दी गई, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है. इसी कारण ग्रामीणों को रैली निकालकर पशु मालिकों को चेतावनी देने के लिए मजबूर होना पड़ा.
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी पशु मालिक अपने मवेशियों को खुले में छोड़ते हैं तो ग्रामीण मवेशियों को पकड़कर दो दिनों तक बंद रखने और संबंधित पशु मालिक से जुर्माना वसूलने की कार्रवाई करेंगे. इसके बावजूद यदि पशु मालिक अपने पशुओं को नहीं संभालते हैं तो मवेशियों को गौशाला भेजने की बात भी ग्रामीणों ने कही.
ग्रामीणों ने बताया कि मानपुर, सीतानाला समेत आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में मवेशियों को खुले में छोड़ दिया जाता है, जिससे किसानों की फसल तो बर्बाद हो ही रही है, साथ ही NH-218 पर भी मवेशियों के विचरण से यातायात प्रभावित होता है और जाम की स्थिति बनती रहती है. ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर मवेशियों के अचानक आ जाने से दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है.
इस समस्या के समाधान को लेकर अमलाबाद ओपी प्रभारी कौशलेंद्र कुमार की ओर से पूर्व में एक बैठक भी की गई थी, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि बैठक के बाद भी मवेशियों को खुले में छोड़ने का सिलसिला बंद नहीं हुआ.
रैली के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि पशु मालिकों को पहले सख्त चेतावनी देकर अपने मवेशियों को घर में बांधकर रखने के लिए कहा जाए. ग्रामीणों ने कहा कि यदि चेतावनी के बावजूद लोग नहीं मानते हैं तो प्रशासन द्वारा नियमानुसार जुर्माना अथवा अन्य कार्रवाई की जाती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी. किसानों ने कहा कि उनकी वर्षों की मेहनत से तैयार हो रही धान की फसल को बचाने के लिए इस समस्या का जल्द स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है. इस भिभूति सोरेन, सोहन मुर्मू, जोटु माहथा, दिलीप ओझा, पानपती समेत सेकड़ो ग्रामीण किसान मौजूद रहे.