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धनबाद/डेस्क: आजादी के 78 वर्ष बीत जाने के बावजूद बाघमारा प्रखंड के बागड़ा पंचायत के ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं से अब भी महरूम हैं. पंचायत के कई इलाकों में सड़क और पुलिया का अभाव आज भी बना हुआ है. बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है, जब छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों को टूटी-फूटी पुलिया पार कर जोखिम उठाते हुए आवाजाही करनी पड़ती है.
सरकारी योजनाओं के बावजूद निर्माण अधर में
राज्य सरकार की 'आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार' पहल के तहत जिले भर में शिविर लगाए जा रहे हैं और तत्काल समस्याओं के समाधान का दावा भी किया जा रहा है. लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि बागड़ा पंचायत में सड़क और पुलिया निर्माण की स्थिति जस की तस है. ग्रामीणों का कहना है कि वे सरकारी आदेश और स्वीकृति का वर्षों से इंतजार कर रहे हैं.
ग्रामीणों ने अपने खर्चे से बनाई थी पुलिया, अब जर्जर
बागड़ा पंचायत को बारकी बस्ती से जोड़ने वाली जोरिया पर आज तक सरकारी पुलिया नहीं बनाई जा सकी. कई वर्ष पहले ग्रामीणों ने अपनी ओर से चंदा जमा कर एक छोटी पुलिया का निर्माण करवाया था, जो अब बारिश और समय के प्रभाव से टूटकर जर्जर हो चुकी है. इसी टूटे ढांचे के सहारे रोजाना सैकड़ों विद्यार्थी साइकिल लेकर स्कूल-कॉलेज जाते हैं, जबकि ग्रामीणों को पीडीएस राशन लेने के लिए भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है.
कई आवेदन दिए, लेकिन सुनवाई नहीं: मुखिया
स्थानीय मुखिया सावित्री कुमारी का कहना है कि उन्होंने पदभार संभालने के बाद से ही विधायक, सांसद और धनबाद डीसी सहित विभागीय अधिकारियों को कई पत्र भेजे, लेकिन किसी ने भी मामले पर संज्ञान नहीं लिया. ग्रामीणों का आरोप है कि वे सुदूर क्षेत्र में रहते हैं, इसलिए उन्हें विकास की मुख्यधारा से दूर रखा जा रहा है. उनका कहना है कि सरकारी इच्छाशक्ति होती तो सड़क और पुलिया का निर्माण कब का पूरा हो चुका होता.
समस्या जल्द सुलझेगी: अंचलाधिकारी
मामले पर बाघमारा अंचलाधिकारी गिरजानंद किस्कु ने बताया कि हाल ही में बागड़ा पंचायत में आयोजित शिविर के दौरान ग्रामीणों ने उन्हें लिखित आवेदन सौंपा था. उन्होंने आवेदन को धनबाद डीसी कार्यालय भेज दिया है. अंचलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों की समस्या का समाधान जल्द ही किया जाएगा.
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