घाघरा में निजी स्कूलों का 'सिंडिकेट’! फीस, किताब और कमीशन के जाल में फंसे अभिभावक

घाघरा में निजी स्कूलों का 'सिंडिकेट’! फीस, किताब और कमीशन के जाल में फंसे अभिभावक

री-एडमिशन से लेकर किताबों तक फिक्स रेट, प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में

घाघरा में निजी स्कूलों का सिंडिकेट’ फीस किताब और कमीशन के जाल में फंसे अभिभावक

पंकज कुमार/डेस्क: 

घाघरा/डेस्क:  घाघरा देशभर में निजी स्कूलों की मनमानी अब खुलकर सामने आ रही है. पढ़ाई के नाम पर अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है. महंगी किताबें, फिक्स वेंडर, मनमाना री-एडमिशन शुल्क और कमीशन का खेल इन सबने शिक्षा व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. ताजा मामलों में सामने आया है कि कई निजी स्कूल अभिभावकों एक ही दुकान या वेंडर से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए है मजबूर कर रहे हैं. बता दे  कि निजी स्कूलों के किताबों की कीमत बाजार से कई गुना अधिक वसूली जा रही है. 

किताबों के नाम पर कमाई का खेल - संतोष साहू

अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन प्रकाशकों और दुकानदारों के साथ मिलकर एक पूरा सिंडिकेट चलाते हैं. इसमें किताबों के सेट तय दुकानों पर ही उपलब्ध होते हैं और कीमतें भी वही तय होती हैं. वही शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक ओर NCERT की किताबें सस्ती होती हैं, वहीं निजी प्रकाशकों की किताबें जानबूझकर महंगी कर दी जाती हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है.

घाघरा के कुछ निजी स्कूलों ने शिक्षा को व्यवसाय बना दिया - नीरज जयसवाल 

मनमानी फीस और महंगी किताबें, यूनिफॉर्म की मोनोपोली के बीच तरह-तरह के नई तरीके और नियमों से अभिभावकों को पॉकेटमारी की जा रही है. प्राइवेट स्कूल संचालक निजी पब्लिकेशन की पुस्तकों को मनमाने दाम पर अभिभावकों को खरीदने के लिए मजबूर करते हैं 

री-एडमिशन और फीस में भी ‘मनमानी

हर साल नए सत्र में री-एडमिशन के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है. कई राज्यों में अभिभावकों ने 30% से 50% तक फीस बढ़ोतरी की शिकायत की है, जिससे मध्यम वर्ग की कमर टूट रही है.

सरकार की चेतावनी के बाद भी  जारी निजी स्कूलों का खेल जारी

दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सरकार ने साफ निर्देश दिया है कि स्कूल किसी एक वेंडर से खरीदारी के लिए बाध्य नहीं कर सकते और फीस भी तय नियमों के अनुसार ही ली जाए.  इसके बावजूद कई जगहों पर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.

कैपिटेशन फीस’ जैसे अवैध तरीकों की आशंका

विशेषज्ञ इसे कैपिटेशन फीस जैसे अवैध मॉडल से जोड़कर देख रहे हैं, जहां तय फीस से अधिक पैसे अलग-अलग नामों पर वसूले जाते हैं. 

अभिभावकों की शिकायतें

  • स्कूल मनमानी फीस वसूल रहे हैं
  • किताबें महंगे पैकेज में बेच रहे हैं विकल्प देने के बजाय दबाव बनाया जा रहा है

इसके खिलाफ कई अभिभावक संगठनों ने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है.

कुछ अनुत्तरित सवाल

  • सबसे बड़ा सवाल कौन कसेगा नकेल
  • सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस एजुकेशन सिंडिकेट पर लगाम कौन लगाएगा
  • क्या प्रशासन सिर्फ निर्देश जारी करेगा या जमीनी स्तर पर कार्रवाई भी होगी
  • जब तक सख्त निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था नहीं बनेगी, तब तक शिक्षा के नाम पर यह पॉकेट मारी जारी रहेगी

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